Vinod VPL

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05/04/2026

स्कूल चलो अभियान के अन्तर्गत डोर टू डोर जनसंपर्क एवं नवीन नामांकन।

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23/10/2024

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29/07/2024

जिस पहाड़ की वजह से बीवी की जान चली गयी उसी पहाड़ को अकेले ही छेनी हथोड़े से खोदकर रास्ता बना दिया।
दशरथ माँझी, जिन्हें "माउंटेन मैन" के नाम से भी जाना जाता है, का जन्म 14 जनवरी 1934 को बिहार के गया के करीब गहलौर गाँव में हुआ था। वे एक गरीब मजदूर थे और मुसहर भुइयां जाति से थे, जो अनुसूचित जाति (SC) में आती है। उनका जीवन संघर्ष और कठिनाइयों से भरा था, लेकिन उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और साहस ने उन्हें एक अद्वितीय नायक बना दिया।

दशरथ माँझी का बचपन कठिनाइयों से भरा था। उनके गाँव में न तो बिजली थी और न ही पानी की उचित व्यवस्था। गाँव से पास के कस्बे जाने के लिए एक पूरा पहाड़ पार करना पड़ता था। उनके छोटे से छोटे हक के लिए भी उन्हें संघर्ष करना पड़ा। दशरथ माँझी ने फाल्गुनी देवी से शादी की और उनका जीवन थोड़ा सुखद हुआ, लेकिन एक दिन उनकी पत्नी की दुखद मृत्यु ने दशरथ के जीवन को बदल दिया।

एक दिन, फाल्गुनी देवी पहाड़ के दूसरे छोर पर लकड़ी काट रहे दशरथ माँझी के लिए खाना ले जा रही थीं। पहाड़ के दर्रे में गिरने से उनकी पत्नी की मौत हो गई। दवाइयों के अभाव में, जो बाजार की दूरी के कारण समय पर नहीं मिल सकीं, फाल्गुनी देवी की मृत्यु ने दशरथ माँझी को झकझोर दिया। उन्होंने संकल्प लिया कि वे अकेले दम पर पहाड़ को काटकर रास्ता निकालेंगे ताकि भविष्य में किसी और को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।

दशरथ माँझी ने 1960 में एक हथौड़ा और छेनी लेकर गहलौर पहाड़ को काटने का काम शुरू किया। लोग उन्हें पागल कहते थे, उनका मजाक उड़ाते थे, लेकिन यह सब उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति को और मजबूत करता गया। उन्होंने बिना रुके, बिना थके 22 साल तक काम किया और अंततः 1982 में 360 फुट लंबी, 30 फुट चौड़ी और 25 फुट ऊँची सड़क बना डाली। इस सड़क ने अत्री और वजीरगंज ब्लाक की दूरी को 55 किलोमीटर से घटाकर 15 किलोमीटर कर दिया।

शुरुआत में दशरथ माँझी को गाँव वालों के ताने सहने पड़े, लेकिन बाद में कुछ लोगों ने उनकी मदद की। उन्होंने दशरथ को खाना दिया और औजार खरीदने में सहायता की। दशरथ माँझी ने अपने इस प्रयास से न केवल गहलौर गाँव के लोगों के जीवन को आसान बनाया, बल्कि एक अद्वितीय मिसाल कायम की।

दशरथ माँझी का जीवन संघर्ष और साहस की एक अद्वितीय कहानी है। उनकी मेहनत और दृढ़ निश्चय ने उन्हें एक सच्चा नायक बना दिया। वे हमें सिखाते हैं कि अगर हमारे इरादे मजबूत हों और हम पूरी लगन से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ें, तो कोई भी बाधा हमें रोक नहीं सकती।

दशरथ माँझी का जीवन एक प्रेरणादायक कहानी है, जो यह दिखाती है कि कठिनाइयों से लड़ते हुए भी एक व्यक्ति कैसे अपने दृढ़ संकल्प और साहस से असंभव को संभव बना सकता है। उनकी कहानी हमें यह सिखाती है कि सच्ची मेहनत और समर्पण से हर सपना साकार हो सकता है।
साभार।जय माता दी।

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