Mamta Ki Baate
Mamta
*आज के ज़माने की कहानी: "वाई-फाई वाला रिश्ता"*
नागपुर के एक फ्लैट में शर्मा जी का परिवार रहता था। पापा, मम्मी, बेटा आरव - 16 साल का, और बेटी कियारा - 12 साल की।
घर में सबसे ज़्यादा झगड़ा वाई-फाई को लेकर होता था।
खाना मेज़ पर लगा होता, पर सबकी नज़र मोबाइल पर। पापा दफ्तर की कॉल पर, मम्मी रील देख रही, आरव गेम खेल रहा, कियारा यूट्यूब शॉर्ट्स देख रही।
रविवार का खाना भी खामोश हो गया था। बस चम्मच की आवाज़ आती थी।
एक रविवार बिजली चली गई। राउटर बंद। सब बोर होकर मुँह लटकाकर बैठ गए।
मम्मी बोलीं "चलो 20 मिनट लूडो खेलते हैं, पुराना वाला बोर्ड निकालो"।
पहले तो सब मना करने लगे। फिर आरव ने गोटी फेंकी... और छह आया। कियारा हार गई तो रोने लगी। पापा ने चालाकी की तो मम्मी ने पकड़ लिया।
20 मिनट, 40 मिनट, एक घंटा बीत गया। बिजली आ गई पर किसी ने मोबाइल नहीं उठाया।
उस रात खाने की मेज़ पर पहली बार सबने एक-दूसरे की आँखों में देखकर बात की। आरव ने अपना मैच हारने का दुख बताया। कियारा ने स्कूल की दोस्ती वाली बात सुनाई।
*सीख:*
तकनीक रिश्ता जोड़ने के लिए बनी है, तोड़ने के लिए नहीं।
घर का असली वाई-फाई तो बातें हैं। पासवर्ड भूल भी जाए तो चलेगा। एक-दूसरे से कट मत होना।
कैसी लगी कहानी? तुम्हारे घर में भी ऐसा "मोबाइल वाला खामोश खाना" होता है क्या?
27/02/2026
एक छोटे से गाँव में किरण नाम का एक गरीब किसान रहता था। उसके पास धन-दौलत तो ज्यादा नहीं थी, लेकिन उसके पास दो अनमोल साथी थे — उसके बैल, मोती और हीरा। किरण अपने बैलों को अपने परिवार का हिस्सा मानता था।
हर सुबह सूरज निकलने से पहले किरण उठ जाता। वह सबसे पहले मोती और हीरा के पास जाता, उनके सिर पर प्यार से हाथ फेरता और उन्हें ताज़ा चारा खिलाता। बैल भी जैसे उसकी भावनाएँ समझते थे। वे धीरे-धीरे अपनी पूँछ हिलाकर और आँखों में स्नेह दिखाकर उसका अभिवादन करते।
किरण अपने बैलों के साथ खेतों में हल चलाता। चाहे गर्मी की तपती धूप हो या सर्दी की ठंडी हवा, तीनों मिलकर मेहनत करते। किरण कभी भी अपने बैलों को ज़्यादा काम नहीं कराता था। जब उन्हें थकान होती, तो वह उन्हें पेड़ की छाँव में आराम करने देता और खुद भी उनके पास बैठकर रोटी खाता।
गाँव के लोग अक्सर कहते, “किरण, तुम इन बैलों को जानवर नहीं, अपने बच्चों की तरह रखते हो।”
किरण मुस्कुराकर जवाब देता, “ये ही तो मेरा सहारा हैं। इनकी मेहनत से ही मेरे घर का चूल्हा जलता है।”
एक साल गाँव में भयंकर सूखा पड़ गया। फसलें खराब हो गईं और कई किसानों ने अपने पशु बेच दिए। लेकिन किरण ने ठान लिया कि वह अपने बैलों को कभी नहीं बेचेगा। उसने खुद कम खाना खाया, पर मोती और हीरा को भरपेट चारा दिया।
कुछ महीनों बाद भगवान ने कृपा की और बारिश शुरू हो गई। खेत फिर से हरे-भरे हो गए। उस साल किरण की फसल बहुत अच्छी हुई। उसने सबसे पहले अपने बैलों के गले में नई रस्सी और रंग-बिरंगी घंटियाँ बांधीं। उसकी आँखों में खुशी के आँसू थे।
किरण समझता था कि सच्चा प्यार और साथ कभी व्यर्थ नहीं जाता। मोती और हीरा भी उसके सच्चे मित्र थे, जिन्होंने हर कठिन समय में उसका साथ दिया।
**सीख:** जो इंसान अपने पशुओं और प्रकृति से प्रेम करता है, प्रकृति भी उसे कभी निराश नहीं करती। 🌿✨
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27/02/2026
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