All Ayurvedic
A Natural Way to Healthy Life हज़ारो वर्षो से चली आ रही भारतीय परम्परा से जुड़े, आइये आयुर्वेद को जाने और निरोग रहे।
09/08/2026
थायरॉइड में क्या सावधानी रखें?
आयुर्वेद के अनुसार
🌿 खान-पान में सावधानी
पत्तागोभी, फूलगोभी, ठंडी चीजें न खाएं।
🧘 योग और प्राणायाम
भस्त्रिका, उज्जायी प्राणायाम नियमित रूप से करें।
🌿 अदरक और मुलेठी का प्रयोग
अदरक, मुलेठी की चाय या काढ़ा पिएं।
🌱 आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां
अश्वगंधा, त्रिफला — विशेषज्ञ की सलाह से।
📖 संदर्भ: चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, और अष्टांग हृदयम्
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09/08/2026
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण:
आयुर्वेद में तलवों में अधिक दाह/जलन को पित्त दोष की वृद्धि और शरीर में उष्णता बढ़ने से जोड़ा जा सकता है। कुछ स्थितियों में वात-पित्त असंतुलन भी भूमिका निभा सकता है।
🔸 संभावित कारण:
• पित्त एवं शरीर में अधिक उष्णता
• लंबे समय तक खड़े रहना या अधिक चलना
• मसालेदार, तला-भुना व अत्यधिक गर्म भोजन
• विटामिन B12 की कमी
• रक्त शर्करा बढ़ना/डायबिटीज
• नसों में कमजोरी या जलन
• पैरों में फंगल इंफेक्शन या त्वचा की समस्या
⚠️ साथ में दिखने वाले लक्षण:
• तलवों में गर्मी या जलन
• झुनझुनी या सुन्नपन
• चुभन या चींटी चलने जैसा महसूस होना
• रात में लक्षण अधिक महसूस होना
• कभी-कभी पैरों में दर्द या भारीपन
🌿 आयुर्वेदिक घरेलू उपाय:
✅ रात को सोने से पहले पैरों को सामान्य/हल्के ठंडे पानी से धोकर अच्छी तरह सुखाएं।
✅ तलवों पर नारियल तेल की हल्की मालिश कर सकते हैं।
✅ पर्याप्त पानी पिएं और बहुत मसालेदार भोजन कम करें।
✅ भोजन में मौसमी फल, हरी सब्जियां और संतुलित आहार शामिल करें।
❌ बहुत गर्म पानी में पैर न डालें।
💊 आयुर्वेदिक औषधि:
आमलकी, गुडूची या शतावरी जैसी औषधियों का उपयोग व्यक्ति की प्रकृति और समस्या के अनुसार किया जाता है।
औषधि चिकित्सकीय सलाह से ही लें, खासकर यदि आप पहले से कोई दवा लेते हैं।
🚨 कब डॉक्टर से जांच करवाएं?
अगर जलन लगातार रहती है, बढ़ रही है, पैरों में सुन्नपन/कमजोरी है, घाव हैं या डायबिटीज है, तो ब्लड शुगर, Vitamin B12 आदि की जांच और चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।
📖 आयुर्वेदिक संदर्भ:
चरक संहिता एवं अष्टांग हृदय में दाह, पित्त दोष तथा उष्णता से संबंधित विकारों का वर्णन मिलता है। उपचार में दोष, कारण और व्यक्ति की प्रकृति के अनुसार चिकित्सा का सिद्धांत बताया गया है।
⚠️ नोट: यह सामान्य आयुर्वेदिक जानकारी है। लगातार तलवों की जलन होने पर कारण की सही जांच जरूरी है।
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#पैरोंमेंजलन #तलवोंमेंजलन #आयुर्वेद
वजन कम करने के लिए सिर्फ कम खाना ही जरूरी नहीं है, बल्कि क्या खा रहे हैं, कब खा रहे हैं और प्लेट में क्या संतुलन है, यह भी महत्वपूर्ण है।
🌾 फाइबर – सब्जियाँ, सलाद, दालें और साबुत अनाज
💪 प्रोटीन – मूंग दाल, पनीर, दही, चना आदि
⏰ सही समय – नियमित समय पर भोजन करें और पाचन शक्ति के अनुसार मात्रा रखें।
आयुर्वेद में मिताहार, उचित समय पर भोजन और पाचन अग्नि की रक्षा को स्वस्थ रहने के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।
संतुलित आहार के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि वजन प्रबंधन में मदद कर सकती है। 🌿
📖 आयुर्वेदिक संदर्भ: चरक संहिता – आहारविधि एवं मिताहार संबंधी सिद्धांत।
09/08/2026
ब्रिस्क वॉकिंग क्या है?
ब्रिस्क वॉकिंग का मतलब है तेज़, नियमित और सतर्क चाल से चलना, जिसमें आपकी साँसें थोड़ी तेज़ हों, शरीर में हल्की गर्माहट आए लेकिन थकान न हो।
🌿 आयुर्वेद के अनुसार
आयुर्वेद में नियमित व्यायाम को स्वास्थ्य का मुख्य आधार बताया गया है। तेज़ गति से चलना त्रिदोष को संतुलित करने, अग्नि को प्रज्वलित करने और मन को प्रसन्न रखने में सहायक माना जाता है।
💚 ब्रिस्क वॉकिंग के लाभ
🔸 अग्नि दीपक – पाचन शक्ति बढ़ाने में सहायक।
🔸 कफ नाशक – शरीर में जमा कफ और अतिरिक्त मेद को कम करने में सहायक।
🔸 रक्त संचार बेहतर – हृदय को बल देने और रक्त संचार को बेहतर रखने में सहायक।
🔸 मानसिक स्वास्थ्य – तनाव और चिंता को कम करने में सहायक।
🔸 हड्डियाँ और मांसपेशियाँ मजबूत – जोड़ों के स्वास्थ्य और शरीर की लचक के लिए लाभकारी।
🔸 रोग प्रतिरोधक क्षमता – शरीर को स्वस्थ रखने और रोगों से लड़ने में सहायक।
📖 आयुर्वेदिक संदर्भ
चरक संहिता (सूत्रस्थान 7/30):
“व्यायामात् लाघवं पुष्टिः बलं वर्णप्रसादकृतता।”
अर्थात व्यायाम करने से शरीर हल्का, पुष्ट, बलवान, स्वास्थ्यवर्धक और तेजस्वी होता है।
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08/08/2026
वात दोष के लक्षण क्या हैं?
🌿 (आयुर्वेद अनुसार)
• शरीर में दर्द और जकड़न
• पाचन कमजोर, गैस और कब्ज की समस्या
• चिंता, तनाव और अनिद्रा
• हड्डियों और जोड़ों में दर्द
• होंठ, त्वचा और शरीर का रूखापन
• ठंड ज्यादा लगना
• मन का चंचल होना, एकाग्रता की कमी
🌿 आयुर्वेद के अनुसार, जब शरीर में वात दोष असंतुलित हो जाता है, तो उपरोक्त लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
📖 आयुर्वेदिक संदर्भ:
चरक संहिता
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#वातदोष #आयुर्वेद
08/08/2026
वात दोष के लक्षण क्या हैं?
🌿 (आयुर्वेद अनुसार)
• शरीर में दर्द और जकड़न
• पाचन कमजोर, गैस और कब्ज की समस्या
• चिंता, तनाव और अनिद्रा
• हड्डियों और जोड़ों में दर्द
• होंठ, त्वचा और शरीर का रूखापन
• ठंड ज्यादा लगना
• मन का चंचल होना, एकाग्रता की कमी
🌿 आयुर्वेद के अनुसार, जब शरीर में वात दोष असंतुलित हो जाता है, तो उपरोक्त लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
📖 आयुर्वेदिक संदर्भ:
चरक संहिता
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#वातदोष #आयुर्वेद
"क्या आपका वजन बढ़ रहा है, लेकिन समझ नहीं आ रहा कि सिर्फ पेट की चर्बी बढ़ रही है या पूरे शरीर का वजन? आयुर्वेद के अनुसार हर तरह का वजन बढ़ना एक जैसा नहीं होता। आइए, आसान भाषा में समझते हैं।"
* पहला: पेट पर चर्बी बढ़ना, कफ दोष और मेद धातु से जुड़ा हो सकता है।
* दूसरा: पूरे शरीर का वजन बढ़ना, मंद जठराग्नि और कफ वृद्धि से संबंधित हो सकता है।
* तीसरा: शरीर में सूजन के कारण भी वजन बढ़ा हुआ दिखाई दे सकता है, जो हमेशा चर्बी नहीं होती।
*
08/08/2026
Songara All Ayurvedic
अनुलोम-विलोम प्राणायाम
श्वास का संतुलन, जीवन में पूर्णता
अनुलोम-विलोम प्राणायाम एक प्राचीन योगिक श्वसन तकनीक है, जिसे नाड़ी शोधन के नाम से भी जाना जाता है। यह श्वास को संतुलित करने, मानसिक शांति प्रदान करने और शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक माना जाता है। आयुर्वेद एवं योग के अनुसार यह प्राणवायु को संतुलित कर शरीर और मन में सामंजस्य स्थापित करने में सहायक है।
🌿 अनुलोम-विलोम के लाभ
• श्वसन तंत्र को मजबूत बनाने में सहायक
• प्राणवायु का संतुलन बनाए रखने में सहायक
• तनाव, चिंता और बेचैनी को कम करने में सहायक
• मन को शांत और एकाग्र बनाने में सहायक
• रक्तचाप को संतुलित रखने में सहायक
• पाचन शक्ति को बेहतर बनाने में सहायक
• प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में सहायक
• नींद की गुणवत्ता सुधारने में सहायक
• ऊर्जा और स्फूर्ति बढ़ाने में सहायक
• नाड़ियों की शुद्धि और शरीर के संतुलन में सहायक
📖 आयुर्वेद एवं योग के अनुसार
अनुलोम-विलोम (नाड़ी शोधन प्राणायाम) इड़ा (चंद्र नाड़ी) और पिंगला (सूर्य नाड़ी) के संतुलन में सहायक माना जाता है। नियमित अभ्यास से श्वास, मन और शरीर के बीच संतुलन बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।
📚 संदर्भ
• चरक संहिता
• हठयोग प्रदीपिका – प्राणायाम अध्याय
• पतंजलि योगसूत्र – अध्याय 2
स्वस्थ शरीर, शांत मन, संतुलित जीवन
आयुर्वेद अपनाएं, जीवन को बेहतर बनाएं।
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#अनुलोमविलोम #प्राणायाम #नाड़ीशोधन #योग #आयुर्वेद #योगाभ्यास #स्वस्थजीवन #मानसिकशांति #तनावमुक्तजीवन
07/08/2026
आप अभी किस समस्या से सबसे ज़्यादा परेशान हैं?
पेट की चर्बी
पूरे शरीर का बढ़ा हुआ वजन
बार-बार भूख लगना
वजन कम नहीं होना
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07/08/2026
खाना खाने के बाद ये 5 काम बिल्कुल नहीं करने चाहिए (आयुर्वेद अनुसार)
❌ 1. तुरंत सोना
इससे पाचन अग्नि मंद हो सकती है और अपच, गैस व वजन बढ़ने की समस्या हो सकती है।
❌ 2. तुरंत पानी अधिक मात्रा में पीना
भोजन के तुरंत बाद बहुत अधिक पानी पीने से जठराग्नि कमजोर पड़ सकती है।
❌ 3. तुरंत भारी व्यायाम करना
भोजन के बाद शरीर की ऊर्जा पाचन में लगती है, इसलिए तुरंत एक्सरसाइज करने से असहजता हो सकती है।
❌ 4. तुरंत स्नान करना
भोजन के बाद स्नान करने से रक्त प्रवाह त्वचा की ओर बढ़ता है, जिससे पाचन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
❌ 5. तुरंत धूम्रपान या चाय-कॉफी पीना
यह पाचन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है और पोषक तत्वों के अवशोषण में बाधा बन सकता है।
📖 आयुर्वेदिक संदर्भ:
चरक संहिता (Charaka Samhita) – भोजन के बाद उचित आहार-विहार का पालन करने और पाचन अग्नि की रक्षा करने पर विशेष बल दिया गया है।
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#आयुर्वेद #स्वस्थजीवन #पाचन #हेल्थटिप्स
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