Aayurveda Rocks

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17/12/2025

*तुम बीमार नहीं हो, बस उम्र बढ़ रही है।*
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कई “बीमारियाँ” असल में बीमारियाँ नहीं होतीं —
वे शरीर में उम्र के साथ आने वाले स्वाभाविक परिवर्तन होते हैं।
बीजिंग के एक अस्पताल के निदेशक ने बुज़ुर्गों के लिए जो पाँच सलाहें दी हैं,
ज़रा ध्यान से पढ़िए —

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1️⃣ याददाश्त कमज़ोर होना

यह अल्ज़ाइमर नहीं है।
यह मस्तिष्क की खुद को बचाने की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है।
डरिए मत — दिमाग बूढ़ा हो रहा है, बीमार नहीं।
अगर आप चाबी कहाँ रखी भूल जाते हैं,
लेकिन खुद ढूंढ लेते हैं —
तो यह भूलने की बीमारी (डिमेंशिया) नहीं है।

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2️⃣ चलने की रफ़्तार धीमी पड़ना या पैर डगमगाना

यह लकवा नहीं है — यह मांसपेशियों की कमजोरी है।
इलाज दवा नहीं — ज़्यादा चलना-फिरना ही असली उपाय है।

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3️⃣ नींद न आना

यह बीमारी नहीं, बस मस्तिष्क की लय बदल रही है।
नींद की बनावट उम्र के साथ बदलती है।
नींद की गोलियों पर निर्भर मत रहिए —
वे गिरने, भूलने और कमजोरी का कारण बनती हैं।
सबसे अच्छा “नींद का इलाज”:
दिन में धूप में थोड़ा समय बिताइए
और नियमित दिनचर्या बनाए रखिए।

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4️⃣ शरीर में दर्द

यह गठिया नहीं,
बल्कि उम्र के साथ तंत्रिकाओं की प्राकृतिक कमजोरी का परिणाम है।

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5️⃣ हाथ-पैरों में हर वक्त दर्द रहना

अधिकांश लोग पूछते हैं —
“क्या यह गठिया है? क्या हड्डियाँ बढ़ गई हैं?”
लेकिन ९९% दर्द किसी बीमारी से नहीं होता।
उम्र के साथ नसों की संवेदना कम होती है,
इसलिए दर्द ज़्यादा महसूस होता है।
इसे सेंट्रल सेंसिटाइजेशन कहा जाता है।
दवा नहीं — हल्का व्यायाम, फिज़ियोथेरपी,
गर्म पानी से सेंक और हल्की मालिश ज़्यादा असरदार हैं।

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6️⃣ मेडिकल रिपोर्ट में “असामान्य” वैल्यूज़

वे भी हमेशा बीमारी नहीं दर्शातीं —
क्योंकि मानक पुराने मापदंडों पर बने हैं।

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7️⃣ WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के अनुसार

बुज़ुर्गों के लिए जाँच के मानक थोड़े ढीले होने चाहिए।
थोड़ा ज़्यादा कोलेस्ट्रॉल हानिकारक नहीं —
बल्कि ऐसे लोग अधिक जीते हैं!
क्योंकि कोलेस्ट्रॉल हार्मोन और कोशिका झिल्ली के लिए ज़रूरी है।
बहुत कम कोलेस्ट्रॉल से प्रतिरोधक शक्ति घटती है।
चीन के अनुसार,
बुज़ुर्गों के लिए आदर्श रक्तचाप है 150/90 mmHg,
जबकि युवाओं के लिए 140/90 mmHg।

उम्र बढ़ना बीमारी नहीं है;
उसे रोग मत मानिए।

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8️⃣ वृद्ध होना कोई रोग नहीं —

यह जीवन का स्वाभाविक चरण है।

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बुज़ुर्गों और उनके बच्चों के लिए सुझाव:

1️⃣ हर असहजता बीमारी नहीं होती।
2️⃣ डर बुज़ुर्गों का सबसे बड़ा दुश्मन है।
रिपोर्टों और विज्ञापनों के गुलाम मत बनिए।
3️⃣ बच्चों का कर्तव्य केवल माता-पिता को अस्पताल ले जाना नहीं,
बल्कि उनके साथ घूमना, धूप में बैठना, बात करना,
साथ खाना और भावनात्मक संबंध बनाए रखना है।

उम्र बढ़ना दुश्मन नहीं —
स्थिर बैठ जाना असली दुश्मन है!

🌿 स्वस्थ रहिए, सक्रिय रहिए!

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एक ब्राज़ीलियन कैंसर विशेषज्ञ के विचार:

1️⃣ वृद्धावस्था आधिकारिक रूप से 60 से शुरू होकर 80 तक रहती है।
2️⃣ “चौथा चरण” — 80 से 90 वर्ष।
3️⃣ “दीर्घायु काल” — 90 के बाद।
4️⃣ वृद्धावस्था की सबसे बड़ी समस्या है अकेलापन।
साथी के जाने के बाद वैधव्य परिवार के लिए बोझ लग सकता है।
इसलिए दोस्तों से संबंध बनाए रखें, मिलते रहें।
बच्चों और पोतों पर बोझ मत बनिए (भले वे कहें नहीं)।

मेरा सुझाव:
अपना जीवन अपने हाथ में रखें —
कब बाहर जाना है, किसके साथ रहना है,
क्या खाना, पहनना, पढ़ना, देखना,
किसे फोन करना — यह सब खुद तय कीजिए।
वरना आप दूसरों पर बोझ बन जाएंगे।

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विलियम शेक्सपियर ने कहा था:

> “मैं हमेशा खुश रहता हूँ क्योंकि मैं किसी से कोई उम्मीद नहीं रखता।”

उम्मीद ही सबसे बड़ा दुख है।
हर समस्या का समाधान है —
सिवाय मौत के।

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बोलने से पहले... सुनिए।
लिखने से पहले... सोचिए।
आलोचना से पहले... अपने भीतर झाँकिए।
प्रतिक्रिया देने से पहले... गहरी साँस लीजिए।
मरने से पहले... पूरा जी लीजिए!

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सबसे अच्छा रिश्ता वो नहीं होता जहाँ लोग परफेक्ट हों,
बल्कि वो जहाँ लोग ज़िंदगी को सुंदर बनाना जानते हैं।
दूसरों की कमी देखिए, पर उनके गुणों की सराहना भी कीजिए।

अगर खुश रहना है — दूसरों को खुश कीजिए।
कुछ पाना है — पहले कुछ दीजिए।
अपने आस-पास प्यार भरे, मुस्कुराते, सकारात्मक लोग रखिए,
और खुद भी वैसे बनिए।

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ज़िंदगी कठिन लगे, आँसू आएँ,
तो भी मुस्कुराइए और कहिए —
“सब ठीक हो जाएगा,
क्योंकि मैं अब भी सफ़र में आगे बढ़ रहा हूँ!”

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छोटी सी परीक्षा:
अगर आपने यह संदेश किसी को नहीं भेजा,
तो इसका मतलब — आप थोड़े अकेले और उदास हैं।
यह संदेश अपने प्रियजनों को भेजिए —
वे आपको कभी नहीं भूलेंगे!

Photos from Aayurveda Rocks's post 07/12/2025

हज़ारों साल पहले जब पश्चिम अंधकार में था, तब भारत के ऋषियों ने नाड़ी दोष की खोज की और इसे गोत्र के रूप में विभाजित करके संसार को उत्तम ज्ञान दिया, जिसे आज का आधुनिक चिकित्सा शास्त्र क्रोमोसोम थ्योरी कहता है। यह गोत्र प्रणाली य गुणसूत्र पर आधारित है, जो पुत्रों में पिता के गुणसूत्रों का 95% और माता का 5% डीएनए ग्रहण करता है। इसीलिए, पुत्री को अपने पिता का गोत्र प्राप्त नहीं होता है। वैदिक गोत्र प्रणाली का मुख्य उद्देश्य य गुणसूत्र को ट्रेस करना है।

29/10/2025

उन्माद (पागलपन)
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अधिक समय तक मानसिक तनाव से पीड़ित रहनेपर कुछ स्त्री-पुरुष उन्माद से पीड़ित होते हैं। उन्माद में रोगी को अपनी स्मरण शक्ति पर नियंत्रण नहीं रहता। वह पागलों जैसी हरकतें करने लगता है। यदि उन्माद की जल्दी चिकित्सा न की जाएतो रोगी ‘पागल’ भी हो जाता है।

?उन्माद क्यों होता है?उत्पत्ति :अधिक समय तक किसी गहरी चिंता या भय से पीड़ित रहने पर उन्माद की उत्पत्ति हो सकती है। अचानक लगे सदमे के कारण भी उन्माद रोग होता है। लकड़ियां अपने प्रेमी द्वारा छोड़कर चले जाने व विश्वासघात के कारण उन्माद से पीड़ित हो सकती हैं।सिर पर लगी चोट भी किसी स्त्री-पुरुष को उन्माद से पीड़ित कर सकती है। प्रकृति विरुद्ध और दूषित आहार के सेवन से उन्माद की विकृति हो सकती है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार वात, पित्त और कफ के प्रकुपित होने पर मस्तिष्क को प्रभावित करने पर उन्माद रोग हो सकता है। अधिक समय तक शोकग्रस्तरहने पर उन्माद की विकृति हो सकती है।

?उन्माद के लक्षण क्या है ?लक्षण :उन्माद रोग के प्रारंभ में रोगी पागलपन की हरकतें करता है। उसे किसी बात का स्मरण नहीं रहता। सब काम उलटे करने लगता है। रोग की अधिकता में रोगी जोर से हंसता या चीखने-चिल्लाने लगता है। कभी जोर से रोने लगता है।उन्माद की उग्रावस्था में रोगी कपड़े उतारकर फेंकने लगता है और तोड़-फोड़ करने लगता है। रोगी के मुंह से लार गिरती है, लेकिन रोगी को कुछ ध्यान नहीं रहता। रोगी कपड़े फाड़ने लगता है।
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उन्माद होने पे क्या खाएं?*.उन्माद के रोगी को दलिया, खिचड़ी, सूप, खीर, दालें व सब्जियों का सेवन कराएं। यदि रोगी चबाकर रोटी खा सके तो उसे रोटी खिला सकते हैं।*.बादाम की 7-8 गिरी रात को जल में डालकर रखें। प्रातः उनके छिलके उतारकर, उसी जल के साथ पीसकर, दूध में मिलाकर पिलाएं ।*.
उन्माद के रोगी को कोष्ठबद्धता होने पर दूध में एरंड का तेल मिलाकर पिलाएं।*

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सर्पगंधा को कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर, 3 ग्राम चूर्ण गुलाब के जल के साथ सेवन कराने से उन्माद रोग में बहुत लाभ होता है।*.
सफेद चंदन का चूरा 3 ग्राम मात्रामें लेकर 60 ग्राम गुलाब जल में डालकर रखें। प्रातः उठकर उसको उबालकर छानकर, मिसरी मिलाकर पीने से उन्माद रोग कम होता है।*.
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20 ग्राम इमली को जल के साथ पीसकर,100 ग्राम जल में मिलाकर, छानकर पीने से उन्माद रोग का प्रकोप नष्ट होता है।*.ब्राह्मी के पत्तों का रस 10 ग्राम मात्रा में लेकर कुलिंजन का3 ग्राम चूर्ण और मधु मिलाकर चाटकर खाने से उन्माद रोग में बहुत लाभ होता है।*.

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शंखपुष्पी का 5 ग्राम रस मधु मिलाकर चाटकर खाने से उन्माद रोग नष्ट होता है। रोगी को सुबह-शाम सेवन कराएं।*.
अनार के पत्ते और गुलाब के फूल दोनों 10-10 ग्राम लेकर जल में उबालकर क्वाथ बनाएं। 100 ग्राम जल शेष रह जाने पर 10 ग्राम शुद्ध घी मिलाकर रोगी को सुबह-शाम पिलाएं।*.
ब्राह्मी और शंखपुष्पी का रस 5-5 ग्राम मात्रा में लेकर, मधु मिलाकर सेवन*.करने से उन्माद का प्रकोप कम होता है।

16/12/2023

Nabhi
A boon for human

14/06/2022

Nabhi
A boon for human
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27/05/2022

Health tips

12/05/2022

सैकड़ों बीमारियों की जड़ .......पेट के कीडे़ ( कृमि ) .......

कीडे़ दो तरह के होते हैं !
प्रथम, बाहर के कीडे़
दूसरे शरीर के अंदर के कीडे़ !
@ बाहर के कीडे़ सर में मैल और शरीर में पसीने की वजह से जन्मते हैं, जिन्हें जूँ, लीख और चीलर आदि नामों से जानते हैं !@ शरीर के अन्दर के कीड़े तीन तरह के होते हैं !* प्रथम पखाने से पैदा होते हैैं, जो गुदा में ही रहते हैं - गुदा द्वार के आस पास काटकर खून चूसते हैं ! इन्हे चुननू आदि अनेकों नामों से जानते हैं ! जब यह ज्यादा बढ़ जाते हैं, तो ऊपर की ओर चढ़ते हैं, जिससे डकार में भी पखाने की सी बदबू आने लगती है !* दूसरे तरह के कीडे़ कफ के दूषित होने पर पैदा होते हैं, जो छः तरह के होते हैं !ये आमाशय में रहते हैं और उसमें हर ओर घूमते है ! जब ये ज्यादा बढ़ जाते हैं, तो ऊपर की ओर चढ़ते हैं, जिससे डकार में भी पखाने की सी बदबू आने लगती है !* तीसरे तरह के कीडे़ रक्त के दूषित होने पर पैदा हो सकते हैं, ये सफेद व बहुत ही बारीक होते हैं और रक्त के साथ - साथ चलते हुये हृदय, फेफडे़, मस्तिष्क आदि में पहुँचकर उनकी दीवारों में घाव बना देते हैं ! इससे सूजन भी आ सकती है और यह सभी अंग प्रभावित होने लगते हैं ! इनके खून में ही मल विसर्जन के कारण खून भी धीरे - धीरे दूषित होने लगता है, जिससे कोढ़ जनित अनेकों रोगहोने का खतरा बन जाता है ! # एलोपैथिक चिकित्सा के मतानुसार अमाशय के कीड़े खान - पान की अनियमितता के कारण पैदा होते हैं - जो छः प्रकार के होते है !1- राउण्ड वर्म 2 - पिन वर्म 3 - हुक वर्म 4 - व्हिप वर्म 5 - गिनी वर्म आदि - कीडे़ जन्म लेते हैं ! # कीडे़ क्यों पैदा होते हैं ..... ? बासी एवं मैदे की बनी चीजें अधिकता से खाने, ज्यादा मीठा गुड़-चीनी अधिकता से खाने, दूध या दूध से बनी अधिक चीजें खाने, उड़द और दही वगैरा के बने व्यंजन ज्यादा मात्रा में खाने, अजीर्ण में भोजन करने, दूध और दही के साथ-साथ नमक लगातार खाने,मीठा रायता जैसे पतले पदार्थ अत्यधिक पीने से मनुष्य शरीर में कीडे़ पैदा हो जाते हैं ! # कीडे़ पैदा होने के लक्षण एवं बीमारियाँ ....... शरीर के अन्दर मल, कफ व रक्त में अनेकों तरह के कीडे़ पैदा होते हैं ! इनमें खासकर बड़ी आंत में पैदा होने वाली फीता कृमि ( पटार ) ज्यादा खतरनाक होती है । जो प्रत्येक स्त्री - पुरूष व बच्चों के पूरे जीवनकाल में अनेकों बीमारियों केा जन्म देती हैं !जो निम्न है :--1 - आंताें में कीड़ों के काटने व उनके मल विसर्जन से सूजन आना, पेट में हल्का - हल्का दर्द,अजीर्ण, अपच, मंदाग्नि, गैस, कब्ज आदि का होना !2 - शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ना, जिससे अनेकों रोगों का आक्रमण !3 - बड़ों व बच्चों में स्मरण शक्ति की कमी, पढ़ने में मन न लगना, कोई बात याद करने पर भूल जाना !4 - नींद कम आना, सुस्ती, चिड़चिड़ापन, पागलपन, मिर्गी, हाथ कांपना, पीलिया रोग आदि होना !5 - पित्ती, फोड़े, खुजली, कोढ़, आँखों के चारों ओर सूजन, मुँह पे झांई, मुहांसे आदि होना ।6 - पुरुषों में प्रमेह, स्वप्नदोष, शीघ्रपतन, बार - बार पेशाब जाना आदि ।7 - स्त्रियों के सफेद पदार्थ बराबर निकलना, श्वेतप्रदर, रक्तप्रदर आदि ।8- बार - बार मुँह में पानी आना, अरुचि तथा दिल की धड़कन बढ़ना, ब्लडप्रेशर आदि ।9 - ज्यादा भूख लगना, बार - बार खाना, खाने से तृप्ति न होना, पेट निकल आना ।10 - भूख कम लगना, शरीर कमजोर होना, आंखो की रोशनी कमजोर होना ।11 - अच्छा पौष्टिक भोजन करने पर भी शरीर न बनना क्योंकि पेट के कीड़े आधा खाना खा जाते है!12 - फेफड़ो की तकलीफ, सांस लेने में दिक्कत, दमा की शिकायत, एलर्जी आदि !13 - बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास में कमी आना !14 - बच्चों का दांत किटकिटाना, बिस्तर पर पेशाब करना, नींद में चौंक जाना, उल्टी होना15 - आंतो में कीड़ो के काटने पर घाव होने से लीवर एवं बड़ी आंत में कैंसर होने का खतरा( कैंसर के जीवाणु खाना के साथ लीवर व आंत में पहुँचकर कीड़ो के काटने से हुए घाव में सड़न पैदा कर कैंसर का रूप ले लेते हैं ) #@ ये कीड़े संसार के समस्त स्त्री - पुरुष व बच्चों में पाये जाते है ! यह छोटे - बडे 1सेन्टीमीटर से 1 मीटर तक लम्बे हो सकते हैं एवं इनका जीवनकाल 10 से 12 वर्ष तक रहता है !यह पेट की आंतो को काटकर खून पीते है जिससे आंतो में सूजन आ जाती है । साथ ही यह कीड़े जहरीला मल विसर्जित भी करते हैं जिससे पूरा पाचन तंत्र बिगड़ जाता है । यह जहरीला पदार्थ आंतो द्वारा खींचकर खून में मिला दिया जाता है जिससे खून में खराबी आ जाती है ! यही दूषित खून पूरे शरीर केसभी अंगों जैसे हृदय, फेफड़े, गुर्दे, मस्तिष्क आदि में जाता है जिससे इनका कार्य भी बाधित होता है और अनेक रोग जन्म ले लेते हैं ! शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है और अनेक रोग हावी हो जाते हैं ! इसलिए प्रत्येक मनुष्य को प्रतिवर्ष कीड़े की दवा जरूर लेनी चाहिए!एलोपैथिक दवाओं में ज्यादातर कीड़े मर जाते हैं, परन्तु जो ज्यादा खतरनाक कीड़े होते हैं, जैसे- गोलकृमि, फीताकृमि, कद्दूदाना आदि, जिन्हें पटार भी कहते हैं, वे नहीं मरतें हैं ।इन कीड़ों पर एलोपैथिक दवाओं को कोई प्रभाव नहीं पडता है !इन्हें केवल आयुर्वेदिक दवाओं से ही खत्म किया जा सकता है !ये कीड़े मरने के बाद फिर से हो जाते हैं । इसका कारण खान - पान की अनियमितता है ।मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिये प्रत्येक वर्ष कीड़े की दवा अवश्य खानी चाहिये ।

कृमि रोग की चिकित्सा
1 - बायबिरंग, नारंगी का सूखा छिलका, चीनी ( शक्कर ) को समभाग पीसकर रख लें । 6 ग्राम चूर्णको सुबह खाली पेट सादे पानी के साथ 10 दिन तक प्रतिदिन लें । दस दिन बाद कैस्टर आयल ( अरंडीका तेल ) 25 ग्राम की मात्रा में शाम को रोगी को पिला दें । सुबह मरे हुए कीड़े निकल जायेंगे ।
2 - पिसी हुई अजवायन 5 ग्राम को चीनी के साथ लगातार 10 दिन तक सादे पानी से खिलाते रहने से भी कीड़े पखाने के साथ मरकर निकल जाते है ।
3 - पका हुआ टमाटर दो नग, कालानमक डालकर सुबह - सुबह 15 दिन लगातार खाने से बालकों के चुननू आदि कीड़े मरकर पखाने के साथ निकल जाते है । सुबह खाली पेट ही टमाटर खिलायें, खाने के एकघंटे बाद ही कुछ खाने को दें ।
4 - बायबिरंग का पिसा हुआ चूर्ण तथा त्रिफला चूर्ण समभाग को 5 ग्राम की मात्रा में चीनी या गुड़ के साथ सुबह खाली पेट एवं रात्रि में खाने के आधा घंटे बाद सादे पानी से लगातार 10 दिनदें ।सभी तरह के कृमियों के लिए लाभदायक है ।
5 - नीबू के पत्तों का रस 2 ग्राम में 5 या 6 नीम के पत्ते पीसकर शहद के साथ 9 दिन खानेसे पेट के कीड़े मर जाते हैं ।
6 - पीपरा मूल और हींग को मीठे बकरी के दूध के साथ 2 ग्राम की मात्रा में 6 दिन खाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं ।

12/05/2022

पक्षाघात paralysis के रोगी के लिए बहुमूल्य
जानकारी और उपचार।
paralysis information and treatment
पक्षाघात (लकवा) पैरालिसिस में रोगी का आधा मुंह टेढ़ा
हो जाता हैं, गर्दन टेढ़ी हो जाती हैं, मुंह
से आवाज़ नहीं निकल पाती, आँख, नाक,
गाल व् भोंह टेढ़ी पढ़ जाती हैं, ये फड़कते
हैं और इनमे दर्द होता हैं। मुंह से लार गिरती
रहती हैं।
पक्षाघात paralysis होने के लक्षण
सबसे पहला लक्षण होता हैं के व्यक्ति को बोलने में
तकलीफ आती हैं, उसके शब्द टूट टूट
कर बाहर आते हैं। काम करते समय सामान हाथो से छूटना, हाथ
पैर जवाब दे जाते हैं, ऐसी स्थिति को पक्षाघात होना
माना जा सकता हैं।
पक्षाघात paralysis कारण ।
पक्षाघात होने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमे प्रमुख हैं हाई
ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक, बैड कोलेस्ट्रोल के बढ़ने से, या कई बार
रोगी को इनमे कोई लक्षण नहीं होते तो
उसको ब्लड क्लॉटिंग की वजह से भी
पक्षाघात (लकवा) हो सकता हैं।
पक्षाघात paralysis के प्रकार।
शरीर के आधे भाग, दायीं या
बायीं तरफ के अंग अपना कार्य बंद कर दे तो इसको
अधरंग बोलते हैं।
कई बार रोगी को एक अंग में ही लकवा
होता हैं तो जैसे ही लकवे के लक्षण दिखाई दे तो तुरंत
देसी गाय का घी गर्म कर के, अगर
घी नहीं हो तो सरसों का तेल गर्म कर के,
उस से तुरंत मालिश करे।
हमारे ब्रेन के दो हिस्से हैं दायां और बायां। अगर ये अटैक हमारे
बाएं हिस्से में आया हैं तो शरीर का दायां भाग नकारा हो
जाता हैं और अगर ये अटैक दायें हिस्से में आया है तो
शरीर का बायां भाग नकारा हो जाता हैं, और अगर दोनों
भागो में अटैक आ जाए तो पूरा शरीर ही
इसकी चपेट में आ जाता हैं।
पक्षाघात paralysis में आयुर्वेद दवा।
अगर पक्षघात दायीं तरफ हैं तो।
अगर शरीर का कोई अंग या शरीर
दायीं तरफ से लकवाग्रस्त है तो उसके लिए
व्रहतवातचिंतामणि रस (वैदनाथ फार्मेसी)
की ले ले। उसमे छोटी-छोटी
गोली (बाजरे के दाने से थोड़ी
सी बड़ी) मिलेंगी। उसमे से
एक गोली सुबह ओर एक गोली साँय को
शुद्ध शहद से लेवें।
अगर पक्षघात बायीं तरफ हैं तो।
अगर कोई भाई बहिन बायीं तरफ से लकवाग्रस्त है
उसको वीर-योगेन्द्र रस (वैदनाथ फार्मेसी)
की सुबह साँय एक एक गोली शहद के
साथ लेनी है।
अब गोली को शहद से कैसे ले………? उसके लिए
गोली को एक चम्मच मे रखकर दूसरे चम्मच से
पीस ले, उसके बाद उसमे शहद मिलकर चाट लें। ये
दवा निरंतर लेते रहना है, जब तक पीड़ित स्वस्थ न
हो जाए।
क्या खायें।
पीड़ित व्यक्ति को मिस्सी रोटी
(चने का आटा) और शुद्ध घी (मक्खन
नहीं) का प्रयोग प्रचुर मात्र मे करना है। शहद का
प्रयोग भी ज्यादा से ज्यादा अच्छा रहेगा।
क्या ना खायें।
लाल मिर्च, गुड़-शक्कर, कोई भी अचार,
दही, छाछ, कोई भी सिरका, उड़द
की दाल पूर्णतया वर्जित है।
फल
फल मे सिर्फ चीकू ओर पपीता
ही लेना है, अन्य सभी फल वर्जित हैं।
लकवा अर्थात पक्षाघात होने पर निम्नलिखित घरेलु उपचार करने
चाहिए।
1. 🙋राई, अकरकरा और शहद तीनो ६-६ ग्राम ले, राई
और अकरकरा को कूट पीसकर कपड़छान कर ले तथा
शहद में मिला ले। इसे दिन में 3-4 बार जीभ पर मलते
रहे। लकवे में आराम मिलता हैं।
2. 🙋पच्चीस ग्राम छिला हुआ लहसुन
पीसकर दूध में उबाले। खीर
की तरह गाढ़ा होने पर उतारकर ठंडा होने पर खाए।
पक्षघात में बहुत आराम मिलेगा।
3. 🙋सौंठ और उड़द उबालकर इसका पानी
पीने से लकवा में बहुत आराम आता हैं, यह नुस्खा
अनेक लोगो पर आजमाया हुआ हैं।
4. 🙋लहसुन की 5-6 कली
पीसकर उसे पंद्रह ग्राम शहद में मिलाकर सुबह शाम
लेने से लकवा में आराम मिलता हैं।
5. 🙋अदरक अथवा सौंठ को महीन पीसकर
उसमे सेंधा नमक मिलाकर तत्काल रोगी को सुंघाए।
पक्षाघात में आराम मिलेगा।
6. 🙋तुलसी की माला कमर में बांधे रखने से
पक्षाघात का भय नहीं रहता।
7. 🙋उड़द, कौंच के बीज, अरण्ड की जड़,
बला, हींग और सेंधा नमक -सभी बराबर
मात्रा में लेकर काढ़ा बनाकर रोगी को दे। इस से
पक्षाघात में आराम मिलता हैं। हाथ पैर काम करने लगते हैं।
8. 🙋अरण्ड का तेल, गंधक, हरड़, बहेड़ा, आंवला और शुद्ध
गुग्गल का समान भाग ले कर खूब कूटे, फिर चने के बराबर गोलिया
बना ले। एक एक गोली दो तीन बार
रोगी को गर्म जल से दे। पक्षाघात खत्म हो जायेगा।
रोगी को रोग की तीव्रता अनुसार
इनमे 2 या 3 घरेलु नुस्खे अपनाने चाहिए। और नारायण तेल,
लाक्षादि तेल अथवा माषादि तेल की मालिश करना लकवा
के रोगी के लिए अत्यंत आवश्यक हैं //

12/05/2022

*नाज़ुक अंगों को घायल कर रहा आपका कठोर व्यवहार ।‌।*

1- *आमाशय* घायल होता है जब आप प्रातः काल अल्पाहार नहीं करते हैं।
2- *किडनी* घायल होती है जब आप 24 घण्टे में 10 गिलास पानी नहीं पीते
3- *पित्ताशय* घायल होता है जब आप रात्रि 11 बजे तक सोते नहीं हैं और सूर्योदय से पूर्व जागते नहीं हैं।
4- *छोटी आंत* घायल होती है जब आप ठंडा और बासी भोजन करते हैं।
5- *बड़ी आंत* घायल होती है जब आप बहुत तला भुना और मसालेदार भोजन करते हैं।
6- *फेफड़े* घायल होते हैं जब आप सिगरेट,और धुयें आदि से प्रदूषित वातावरण में सांस लेते हैं।
7- *लिवर* घायल होता है जब आप बहुत भारी जंक, फ़ास्ट फ़ूड खाते हैं।
8- *हृदय* घायल होता है जब आप अपने भोजन में अधिक नमक और केमिकल रिफाइंड तेल खाते हैं।
9- *अग्नाशय* घायल होता है जब आप मीठी चीजें अधिक मात्रा में खाते हैं क्योंकि वो स्वादिष्ट और सहज उपलब्ध हैं।
10- *आँखें* घायल होती हैं जब आप कम प्रकाश में मोबाईल और कम्प्यूटर स्क्रीन पर काम करते हैं।
11- *मस्तिष्क* घायल होता है जब आप नकारात्मक सोचने लगते हैं।
12- *आत्मा* घायल होती है जब आप नैतिकता के विरुद्ध कार्य करते हैं।
*👉आप सभी अंगो को अच्छी तरह से देखभाल कर अपने को स्वस्थ रखिये।*
*हम सभी को इसकी जानकारी होनी चाहिए आइये इस पर मनन करें व दूसरों को भी बताएँ ।*
🚩🚩🚩🙏🙏🙏🙋

02/04/2022

*❌एम्स ने कैंसर होने के कारण बताये हैं :-🔴🔴पालीथीन में गरम सब्जी कभी भी पैक न करवाऐं।❌1.चाय कभी भी प्लास्टिक के कप में न लें।
❌2.कोई भी गरम चीज प्लास्टिक में न लें,* *खासकर भोजन।
❌3. खाने की चीजों को माइक्रोवेव में प्लास्टिक के बर्तन में गर्म न करें।
❌याद रखें जब प्लास्टिक गर्मी के संपर्क में आता है तो ऐसा रसायन उत्पन करता है जो 32 प्रकार के कैंसर का कारण है।
❌इस प्रकार ये sms 100 फालतू के sms से बेहतर है।अपने मित्रों और रिश्तेदारों को सूचित करें ताकि वे ऐसे प्रभाव से दूर रहें। क्रपया शेयर जरूर करें। 💯✔*
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*मुम्बई*
*यह संदेश भारत में कार्यरत डाक्टरों के समूह से है, जिसको आम जनता के हित में भेजा जा रहा है ।*
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*1) कृपया APPY FIZZ का सेवन न करें, क्योंकि इसमें कैंसर*
*पैदा करने वाले रसायन है ।*
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*2) कोक या पेप्सी सेवन करने से पहले व बाद में मेन्टोस का सेवन न करें क्योंकि इसका सेवन करने से मिश्रण साईनाइड में बदल* *जाता है, जिससे सेवन करने वाले व्यक्ति की मौत*
*हो सकती है ।*
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*3) कुरकुरे का सेवन न करें क्योंकि इसमें प्लास्टिक की काफ़ी मात्रा होती*
*है । इसकी पुष्टी के लिये कुरकुरे*
*को जलायें तो देखेंगे कि प्लास्टिक पिघलने लगा है --टाइम्स*
*आफ़ इण्डिया की रिपोर्ट*
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*4) इन गोलियों का सेवन तुरन्त बन्द करें क्योंकि ये बहुत ख़तरनाक है:-*
* *डी-कोल्ड /D-cold*
* *Vicks Action-500*
* *एक्टिफाइड/Actified*
* *कोल्डारिन/Coldarin*
* *कोसोम/Cosome*
* *नाईस/Nice*
* *निमुलिड़/Nimulid*
* *सैट्रीजैट-डी/Cetrizet-D*
*इन गोलियों में फिनाईल प्रोपेनोल- एमाइड पीपीए होता है*
*जिससे ह्रदयाघात् होता है ।* *इसलिये यह दवा अमेरिका में*
*प्रतिबन्धित है ।*
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*वाटस्ऐप पर आप मुफ़्त में महत्वपूर्ण सूचना से सभी को अवगत करा सकते हैं अत: इसे पढ़ें और सभी को सूचित करें ।*
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*अमेरिका के डाक्टरों को व्यक्तियों में हो रहे नये प्रकार के कैंसर का पता चला है जोकि "सिल्वर नाइट्रो आक्साइड"के कारण पनप रहा है ।*
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*मोबाइल चार्ज करने के लिये रीचार्ज कार्ड ख़रीदें तो कोड नम्बर के लिये कोड लाइन को नाख़ून से न खुर्चें,*
*क्योंकि कोड को छुपाने में सिल्वर "नाइट्रो आक्साइड" नाम के रसायन*
*की परत होती है, जिससे त्वचा का कैंसर होता है ।*
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*महत्वपूर्ण स्वास्थ्य बातें:-*
*सेलफ़ोन पर बातें करते समय बायें कान की तरफ़ रखें ।*
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*ठण्डे पानी के साथ गोलियाँ न ले।*
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*सांय पाँच बजे के बाद भारी भोजन का सेवन न करें ।*
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*हमेशा! सुबह ज़्यादा पानी पीयें, व रात के समय कम।*
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*सोने का सबसे अच्छा समय रात के दस बजे से सुबह चार बजे तक होता*
*है ।*
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*दवाईयां खाना लेने के बाद तुरन्त न लेवें।*
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*जब भी बैटरी अंतिम बार पर हो, सेलफोन से बात न करें,क्योंकि तब ध्वनी तरेंगे एक हज़ार गुणा शक्तिशाली हो जाती है ।*
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*अमेरिकी रसायन अनुसंधान केन्द्र*
*के जाँच परिणाम के अनुसार:*
*चाय को न तो प्लास्टिक के कपों में पीयें न ही प्लास्टिक पेपर पर भोजन करें । क्योंकि प्लास्टिक गरम होने पर इसमें रासायनिक परिवर्तन होने लगते*
*हैं जिनसे 52 प्रकार के कैंसर होने का ख़तरा है ।*
🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴
*एक अच्छे संदेश से सभी को अवगत*
*करवाना हँसी मज़ाक़ के 100 संदेश भेजने से अच्छा है ।*
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*यह सभी के लिये उपयोगी है।*
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*ज्ञान बड़ा महत्वपूर्ण है जितना*
*बाटोगे उतना बढेगा ।*
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*कृपया अपने परिचितों ,दोस्तो ,रिशतेदारों को अवश्य अवगत कराये*

24/03/2022

हींग उपचार और प्रयोग

हींग कोई फल या फूल नहीं होती ,यह तो पेड़ के तने से निकली हुई गोंद होती है। इसका पेड़ 5 से 9 फीट उंचा होता है। इसके पत्ते 1 से 2 फीट लम्बे होते हैं-

हींग को हम रोज खाने का जायका बढ़ाने के लिए सब्जियों में डालते हैं। इससे खाना तो टेस्टी बनता ही है साथ ही ये पेट के लिए भी अच्छा रहता है। हींग (Asafoetida) का प्रयोग हम मुख्य तौर पर खाने में मसाले के रूप में ही करते है.

हींग को खाने के स्वाद को बढाने के साथ साथ कई तरह के घरेलू नुस्खों में भी प्रयोग किया जाता है। हींग को दाल और रायते में छौंक लगाने में भी प्रयोग किया जाता है-

हम हींग से होने वाले फायदों के बारे में बात करेंगें क्योकि हींग में बहुत से लाभदायक गुण पाये जाते है-

1- हींग अपच, पेट दर्द, जी मिचलाना, दांत दर्द, जुकाम, खांसी, सर्दी के कारण सिरदर्द, बिच्छू, बर्र आदि के जहरीले प्रभाव और जलन को कम करने में काम आती है। ये ऎसे गुण है जो शायद ही कुछ ही लोगों को पता होंगे।

2- यदि कभी आपको अचानक से पेट दर्द होने लगे तब थोड़ी सी हींग को पानी में घोलकर हल्का सा गर्म करके नाभि तथा इसके आसपास लेप लगायें, ऐसा करने से पेट दर्द में तुरंत ही आराम मिल जायेगा।
नाभि के आसपास गोलाई में इस पानी का लेप करने से पेट दर्द, पेट फूलना व पेट का भारीपन दूर हो जाता है।

3- दांत दर्द की समस्या होने पर हींग में थोड़ा सा कपूर मिलाकर दर्द वाली जगह पर लगाने से दांत में दर्द होना बंद हो जाता है।

4- कान में दर्द होने पर तिल के तेल में हींग को पकाकर उस तेल की बूंदों को कान में डालने से कान का दर्द समाप्त हो जाता है।

5- पीलिया होने पर हींग को गूलर के सूखे फलों के साथ खाना चाहिए। पीलिया होने पर हींग को पानी में घिसकर आंखों पर लगाने से फायदा होता है।

6- अपने रोज के खाने में दाल, कढ़ी और सब्जियों में हींग का प्रयोग करने से खाने को पचने में सहायता मिलती है।

7- हींग की मदद से शरीर में ज्यादा इन्सुलिन बनता है और ब्लड शुगर का स्तर नीचे गिरता है। ब्लड शुगर के स्तर को घटाने के लिए हींग में पका कड़वा कद्दू खाना चाहिए।

8- हींग में कोउमारिन होता है जो खून को पतला करने में मदद करता है और इसे जमने से रोकता है। हींग बढ़े हुए ट्राइग्लीसेराइड और कोलेस्ट्रोल को कम करता है और उच्च रक्तचाप को भी घटाता है।

9- छाछ में या भोजन के साथ हींग का सेवन करने से अजीर्ण वायु, हैजा, पेट दर्द, आफरा में आराम मिलता है।

10- हींग में वह शक्ति होती है जो कर्क (कैंसर) रोग को बढ़ावा देने वाले सेल को पनपने से रोकता है।

11- अगर किसी खुले जख्म पर कीडे पड़ गए हों तो, उस जगह पर हींग का चूर्ण लगाने से कीड़े समाप्त हो जाते हैं।

12- हींग के चूर्ण में थोडा सा नमक मिलाकर पानी के साथ लेने से लो ब्लड प्रेशर में आराम मिलता है।

13- बच्चों के पेट में कीडे होने पर जरा सी हींग एक चम्मच पानी में घोलकर रूई के फाहे को उसमें डुबोकर बच्चे के पॉटी होल में रख दें ।
इसके बाद जब बच्चा पॉटी करेगा तो सारे कीड़े मर कर पॉटी के साथ निकल जाएंगे।
यदि बड़ो के पेट में भी कीड़े हो जाए तो ये उपाय वो भी अपना सकते हैं।

14- यदि आपके शरीर के किसी जगह पर कांटा चुभ गया हो तो उस जगह पर हींग का घोल लगा दें , ऐसा करने से काँटा चुभने का दर्द भी कम होगा और कांटा अपने आप ही निकल जायेगा।

15- भुनी हुई हींग को रूई के फाहे में लपेटकर दाढ़ पर रखने से राहत मिलती है। दांत में कीडा लगने पर भी इससे आराम मिलता है।

16- हींग का धुआं सूंघने से हिचकियां बंद हो जाती हैं।

17- एसिडिटी की समस्या होने पर थोड़ी सी हींग को गुड़ में मिलाकर गरम पानी के साथ खा लें, इससे गैस से होने वाले दर्द में आराम मिल जायेगा।

18- पसलियों में दर्द होने पर हींग रामबाण की तरह से काम करता है।
ऎसे में हींग को गरम पानी में घोलकर लेप लगाएं, सूखने पर प्रक्रिया दोहराएं। आराम मिलेगा।

19- पेट में दर्द व ऐंठन होने पर अजवाइन और काले नमक नमक के साथ हींग का सेवन करने से दर्द में काफी फायदा मिल जाता है।

20- प्रसव के उपरांत हींग का सेवन करने से गर्भाशय की शुद्धि होती है और उस महिला को पेट संबंधी कोई परेशानी नहीं होती है।

21- जोडों के दर्द में इसका नियमित सेवन बहुत ही लाभदायक रहता है।

22- माइग्रेन और सिरदर्द में आधा कप पानी में हींग मिलाकर पीने से आराम मिलता है।

23- दाद, खाज, खुजली जैसे त्वचा संबंधी रोगों के लिए हींग बहुत फायदेमंद होती है।

चर्म रोग होने पर हींग को पानी में घिसकर प्रभावित स्थानों पर लगाने से फायदा होता है।

24- अफीम का नशा उतारने के लिए थोडी सी हींग को पानी में घोलकर पिला दें, इससे नशा जल्दी उतर जाता हैं।

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