Puneet Pandit

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mistercap

23/06/2026
exam #song 19/06/2026

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19/06/2026

With Ghumakkad Laali – I just earned their Ghumakkadlaali badge! 🎉

14/06/2026
05/06/2026

With Viola Snow – I just got recognized as one of their top fans! 🎉

“फिर से उठ हो खड़ा…” 🔥

जीवन में कुछ ऐसे पल आते हैं जब पैरों तले की ज़मीन खिसकती हुई लगती है - जब थकान हड्डियों में घर कर लेती है, जब हार आँखों में आँखें डालकर खड़ी हो जाती है, और जब जो कुछ भी टूटा है, बिखरा है - वह सब मिलकर एक बोझ बन जाता है जिसे ढोना असंभव लगने लगता है।

यह कविता उन्हीं पलों की कोख से जन्मी है।

मैंने इसे किसी प्रेरणा-भाषण की तरह नहीं लिखा। मैंने इसे एक स्वीकारोक्ति की तरह लिखा - उस हिस्से की आवाज़ में जो गिरा है, जिसने खून बहाया है, जिसने संशय को अपनी छाती पर बैठे महसूस किया है। क्योंकि मेरा मानना है कि असली साहस वे नहीं लिखते जो कभी लड़खड़ाए नहीं - असली साहस उनके भीतर पकता है जिन्होंने धूल का स्वाद चखा है, और फिर भी उठना चुना है।

“गिर गया तो क्या हुआ, रक्त बहा तो क्या हुआ -"

हर वह घाव जो तुमने झेला है, कमज़ोरी की निशानी नहीं है। वह इस बात का प्रमाण है कि तुम मैदान में उतरे थे। वह एक लड़ाई का साक्ष्य है - चाहे अधूरी हो, चाहे अपूर्ण हो।

मैंने इस कविता में किसी विजयी योद्धा की गर्जना नहीं उकेरी। मैंने उस इंसान की काँपती, थकी हुई साँस को शब्द दिए हैं जो अभी भी यहाँ है। जो टूटे हुए आत्मविश्वास के साथ, एक विरोधी संसार के सामने, बस एक और क़दम उठाने का चुनाव करता है। शनैः शनैः - धीरे-धीरे, स्थिरता से, बिना किसी तमाशे की ज़रूरत के।

जीवन केवल शक्तिशाली लोगों का युद्धक्षेत्र नहीं है। यह एक लंबा, टेढ़ा-मेढ़ा रास्ता है - और उस पर वही पहुँचते हैं जो चलते रहते हैं। गिरते हैं, उठते हैं, लहूलुहान होते हैं, और फिर उठते हैं।

जो आज इन पंक्तियों में खुद को पहचान रहे हैं - तुम टूटे नहीं हो। तुम लड़ाई के बीच में हो। और यह बात उस टूटे होने से कहीं अधिक पवित्र है।

...फिर से उठ हो खड़ा। 🙏

- आकाश ‘व्योम’ गोयल

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*Lyrics & poetry*: Aakash 'Vyom' Goel ©️Ⓟ
*Vocals & Music*: AI-generated under the creative direction of Aakash 'Vyom' Goel ©️Ⓟ
[Disclosures as per platform AI content guidelines]
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#aakashvyomgoel #aakashvyom #spinningintheuniverse #hindikavita #inspiration 27/05/2026

“फिर से उठ हो खड़ा…” 🔥 जीवन में कुछ ऐसे पल आते हैं जब पैरों तले की ज़मीन खिसकती हुई लगती है - जब थकान हड्डियों में घर कर लेती है, जब हार आँखों में आँखें डालकर खड़ी हो जाती है, और जब जो कुछ भी टूटा है, बिखरा है - वह सब मिलकर एक बोझ बन जाता है जिसे ढोना असंभव लगने लगता है। यह कविता उन्हीं पलों की कोख से जन्मी है। मैंने इसे किसी प्रेरणा-भाषण की तरह नहीं लिखा। मैंने इसे एक स्वीकारोक्ति की तरह लिखा - उस हिस्से की आवाज़ में जो गिरा है, जिसने खून बहाया है, जिसने संशय को अपनी छाती पर बैठे महसूस किया है। क्योंकि मेरा मानना है कि असली साहस वे नहीं लिखते जो कभी लड़खड़ाए नहीं - असली साहस उनके भीतर पकता है जिन्होंने धूल का स्वाद चखा है, और फिर भी उठना चुना है। “गिर गया तो क्या हुआ, रक्त बहा तो क्या हुआ -" हर वह घाव जो तुमने झेला है, कमज़ोरी की निशानी नहीं है। वह इस बात का प्रमाण है कि तुम मैदान में उतरे थे। वह एक लड़ाई का साक्ष्य है - चाहे अधूरी हो, चाहे अपूर्ण हो। मैंने इस कविता में किसी विजयी योद्धा की गर्जना नहीं उकेरी। मैंने उस इंसान की काँपती, थकी हुई साँस को शब्द दिए हैं जो अभी भी यहाँ है। जो टूटे हुए आत्मविश्वास के साथ, एक विरोधी संसार के सामने, बस एक और क़दम उठाने का चुनाव करता है। शनैः शनैः - धीरे-धीरे, स्थिरता से, बिना किसी तमाशे की ज़रूरत के। जीवन केवल शक्तिशाली लोगों का युद्धक्षेत्र नहीं है। यह एक लंबा, टेढ़ा-मेढ़ा रास्ता है - और उस पर वही पहुँचते हैं जो चलते रहते हैं। गिरते हैं, उठते हैं, लहूलुहान होते हैं, और फिर उठते हैं। जो आज इन पंक्तियों में खुद को पहचान रहे हैं - तुम टूटे नहीं हो। तुम लड़ाई के बीच में हो। और यह बात उस टूटे होने से कहीं अधिक पवित्र है। ...फिर से उठ हो खड़ा। 🙏 - आकाश ‘व्योम’ गोयल *************** *Lyrics & poetry*: Aakash 'Vyom' Goel ©️Ⓟ *Vocals & Music*: AI-generated under the creative direction of Aakash 'Vyom' Goel ©️Ⓟ [Disclosures as per platform AI content guidelines] *************** #aakashvyomgoel #aakashvyom #spinningintheuniverse #hindikavita #inspiration

“क्या क्या है तेरे अंदर” 🔱

यह नज़्म किसी और के लिए नहीं लिखी।

यह तुम्हारे लिए लिखी है। तुम्हारे बारे में लिखी है।

जब मैंने लिखा - "सारे सवालों का जवाब छिपा तुझमें” - तो मैं किसी मंदिर की मूर्ति से नहीं बोल रहा था। मैं तुमसे बोल रहा था। तुम्हारे भीतर के उस अनंत से, जिसे तुम बाहर ढूँढते फिरते हो।

चाँदनी भी तुम्हारे अंदर। मेहताब भी। जन्नत भी। तुलु-ए-आफ़ताब भी।

और फिर भी - हम भागते हैं। इस किताब के पीछे। उस ख़िताब के पीछे। इस गुरु के पास। उस मज़हब की तरफ। जैसे कोई अपनी परछाई से बिछड़ा हो और उसे दुनिया भर में ढूँढ रहा हो।

उपनिषदों ने हज़ारों साल पहले कह दिया था -

तत् त्वम् असि।

वो जो है - वो तुम हो।

शिव बाहर नहीं है। शिव तुम हो।

महाकाल किसी कैलाश पर नहीं बैठे - वो तुम्हारी साँस में हैं, तुम्हारी चेतना में हैं, तुम्हारे होने में हैं।

यह नज़्म एक प्रश्न है - पर जवाब तुम्हें बाहर नहीं मिलेगा।

रुको। भीतर जाओ। सुनो।

वहीं है सब कुछ। हमेशा से था।

ॐ नमः शिवाय 🙏🩵

- Aakash ‘Vyom’ Goel

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*Lyrics & poetry*: Aakash 'Vyom' Goel ©️Ⓟ
*Vocals & Music*: AI-generated under the creative direction of Aakash 'Vyom' Goel ©️Ⓟ
[Disclosures as per platform AI content guidelines]
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#TatTvamAsi #ShivaWithin #AdvaitaVedanta #HindiPoetry #UrduShayari AakashVyom SpinningInTheUniverse SwargKiKhoj Mahadev SpiritualPoetry OmNamahShivaya KnowThyself ModernHindiPoet BhaktiPoetry VyomKiKalam 15/05/2026

“क्या क्या है तेरे अंदर” 🔱 यह नज़्म किसी और के लिए नहीं लिखी। यह तुम्हारे लिए लिखी है। तुम्हारे बारे में लिखी है। जब मैंने लिखा - "सारे सवालों का जवाब छिपा तुझमें” - तो मैं किसी मंदिर की मूर्ति से नहीं बोल रहा था। मैं तुमसे बोल रहा था। तुम्हारे भीतर के उस अनंत से, जिसे तुम बाहर ढूँढते फिरते हो। चाँदनी भी तुम्हारे अंदर। मेहताब भी। जन्नत भी। तुलु-ए-आफ़ताब भी। और फिर भी - हम भागते हैं। इस किताब के पीछे। उस ख़िताब के पीछे। इस गुरु के पास। उस मज़हब की तरफ। जैसे कोई अपनी परछाई से बिछड़ा हो और उसे दुनिया भर में ढूँढ रहा हो। उपनिषदों ने हज़ारों साल पहले कह दिया था - तत् त्वम् असि। वो जो है - वो तुम हो। शिव बाहर नहीं है। शिव तुम हो। महाकाल किसी कैलाश पर नहीं बैठे - वो तुम्हारी साँस में हैं, तुम्हारी चेतना में हैं, तुम्हारे होने में हैं। यह नज़्म एक प्रश्न है - पर जवाब तुम्हें बाहर नहीं मिलेगा। रुको। भीतर जाओ। सुनो। वहीं है सब कुछ। हमेशा से था। ॐ नमः शिवाय 🙏🩵 - Aakash ‘Vyom’ Goel *************** *Lyrics & poetry*: Aakash 'Vyom' Goel ©️Ⓟ *Vocals & Music*: AI-generated under the creative direction of Aakash 'Vyom' Goel ©️Ⓟ [Disclosures as per platform AI content guidelines] *************** #TatTvamAsi #ShivaWithin #AdvaitaVedanta #HindiPoetry #UrduShayari AakashVyom SpinningInTheUniverse SwargKiKhoj Mahadev SpiritualPoetry OmNamahShivaya KnowThyself ModernHindiPoet BhaktiPoetry VyomKiKalam

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