Upendra Rai
पत्रकारिता, साहित्य लेखन, कविता, राजनीतिक विश्लेषक
07/07/2024
दोपहर एक बजे के करीब अपने पत्नी को फोन किया तो उन्होंने कहा कि शिवांश (छोटा पुत्र) अपने स्कूल में टाफी बांटने के लिए पैसा मांग रहे। मैंने पूछा, आज क्या है? उन्होंने भी कहा कि वे कह रहे थे कि तुम्हारी विवाह की वर्षगांठ पर सबको टाफी देकर बताऊंगा। मैं तो आवाक रह गया कि हमें याद भी नहीं आज ही के दिन हम श्रद्धा के साथ दाम्पत्य जीवन में आये थे।
खैर, अब यह सब देखते-देखते वह भी अभ्यस्त हो चुकी हैं। उनको भी कोई गिला सिकवा नहीं रहा। ऐसी धर्मपत्नी भी मिल सकती है, जिसे ऐसी बातों का मलाल नहीं, यह तो ऊपर वाले की हम पर बहुत बड़ी कृपा ही रही होगी। हमने तो सात जन्मों की कसम खाई थी, लेकिन अगले सौ जन्मों में भी यही मिलें। मेरी भोले शंकर से यही प्रार्थना है।
22/04/2024
।।गुलाब।।
कांटों के बीच अपनी पंखुड़ियों को फैलाता हूं,
गुलाब हूं मैं, हर एक के नाकों तक खुशबू ले जाता हूं।
कांटे हर वक्त कोशिश करते हैं,
हमारी पंखुड़ियों में आने की।
मगर उनसे सजग रह कर,
मैं कोशिश करता हूं सुंगध फैलाने की।।
कभी-कभी हवा के झोके उन्हें दे देते हैं मौका,
मगर अधिकांश फुल आपके पास लाता हूं।।
कांटों के बीच अपनी पंखुड़ियों को फैलाता हूं,
गुलाब हूं मैं, हर नाकों तक खुशबू ले जाता हूं।
मैं कभी दुखी नहीं होता उन कांटों से,
क्योंकि उनका तो काम है अवरोध लाना।।
वे तो कांटे हैं आखिर काटे ही रहेंगे,
मैं जिसके लिए बना हूं, वह हमें है करते जाना।।
आखिर मैं उनसे उलझुं तो,
फिर मैं अपना काम कैसे कर पाऊंगा।।
समाज में खुशबू के लिए बना हूं मैं,
समाज को कैसे अपने खुशबू से परिचित कराऊंगा।।
कांटे हैं, उन कांटों का क्या,
उनको मैं हमेशा पीछे धकेल ले जाता हूं।।
कांटों के बीच अपनी पंखुड़ियों को फैलाता हूं,
गुलाब हूं मैं, हर नाकों तक खुशबू ले जाता हूं।
आखिर समाज में भी तो हैं हजारों कांटे,
उन कांटों को देख अपना दर्द भूल जाता हूं।।
कांटों के बीच अपनी पंखुड़ियों को फैलाता हूं,
गुलाब हूं मैं, हर नाकों तक खुशबू ले जाता हूं।
24/08/2023
भगवान शिव ने जिसे अलकों (जटाओं) में बांध लिया था, वह अलकनंदा, जिसे विष्णुगंगा भी कहते हैं, जो कैलाश से बढ़ते हुए आगे चलकर गंगा के रूप में मोक्षदायिनी बन जाती है। अपने लिए ऐसी ही उम्मीद को पालकर जिसका नाम अलकनंदा रखा, उस हमारी छोटी बच्ची का आज जन्मदिन है।
भगवान भोलेनाथ की कृपा और आप सभी का आशीर्वाद बना रहे।
नये भारत की नई उड़ान, चंदा मामा पर हम बन गये डान।
06/08/2023
।।ऊं।।
भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा से रूद्राभिषेक कराने का अवसर मिला।
।। जय शिव शंकर।।
05/07/2023
अब उम्र ऐसी हो गई है कि हर वक्त आजमाते रहना है कि कहीं हम बुड्ढे तो नहीं हो गये। यूं ही चढ़ गया आम के पेड़ पर।
04/11/2022
अच्छा यदि हर दिन दिल में रहने वाले, कभी साथ-साथ चलने वाले अचानक बहुत वर्षों बाद मिल जाएं तो दिल बाग-बाग हो जाता है। इस भागम-भाग की जिंदगी में पुराने साथी का अचानक मिलना इस संसार का सबसे बड़ा आत्मीय सुख है।
यह सप्ताह मेरे लिए बहुत ही सौभाग्य की बात रही। हमारे कांकेर के साथी आनंद महावे से छह वर्ष बाद (आनंद तो जीवन काल में पहली बार यूपी आते थे।), प्रयागराज के साथी अखिलेश मिश्र, पवन हंस (सुपर पावर बस से कम नहीं हैं।) अजीत भाई, एम्स के विख्यात डाक्टर विवेक जी, कैप्टन विश्वजीत जी, बक्सर के प्रिय साथी रविकांत सिंह, हरे राम भैया से मुलाकात हुई। वह पुरानी बातें याद कर मन का बोझ हल्का हो गया।
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