Samrat ayurvedic
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24/12/2023
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25/06/2023
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19/04/2023
बवासीर (Piles) एक अत्यंत ही असहज करने वाली और अक्सर एक लज्जास्पद बीमारी है। एलोपैथी में बवासीर का इलाज सिर्फ आपरेशन है और वो भी कभी कभी स्थाई इलाज नही होता है।
आयुर्वेद में बवासीर का स्थाई इलाज संभव है। Samrat healthcare (PILES-2) एक पूर्णयतः आयुर्वेदिक गोली है जो बवासीर की समस्या से छुटकारा दिलाती है।
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1 डिब्बी पाइल्स-2 में 60 गोली होती है यानी 30 दिन की dose। पाइल्स को जड़ से समाप्त करने के लिए 2 डिब्बी का कोर्स अर्थात 45-60 दिनों तक सेवन करना लाभकारी रहेगा।
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09/04/2023
साइटिका क्या है?
साईटिका को मुख्य रूप में पैरों में होने वाला दर्द माना जाता है। ऐसा साईटिक नर्व में जलन, दबाव या किसी अन्य कारण से होने लगता है। आपको बताते चलें साइटिक नर्व (sciatic nerve) के बारे में, ये हमारे शरीर की सबसे लंबी, मोटी, और बेहद महत्त्वपूर्ण नर्व (तंत्रिका, नस) में से एक है जो कि कमर के निचले हिस्से से होती हुई कूल्हे के रास्ते दोनों पैरों में जा पहुंचती है। दर्द की तीव्रता हल्के से लेकर बहुत तेज़ भी हो सकती है। कई बार तीव्र और जलन वाला दर्द इंसान को परेशान कर देता है। आमतौर पर यह दर्द एक तरफ के पैर में ही पाया जाता है। लेकिन मुमकिन है कि इसका प्रभाव दोनों पैरों में देखने को मिले।कैसा होता है साइटिका में होने वाला दर्द?
कुछ मौकोें पर यह दर्द इतना परेशान कर देने वाला हो जाता है कि व्यक्ति को किसी जगह से दोबारा उठने का मन नहीं करता। इस प्रकार का दर्द विभिन्न तरह से हो सकता है। यानि कि यह निरंतर रूप से आपको परेशान कर सकता है। या फिर ये समय – समय पर अपना प्रभाव डाल कर गायब हो जाता है। और कमर के मुकाबले साईटिका से पीड़ित होने वाले व्यक्ति को पैरों में ज़्यादा दर्द महसूस होता है। इस तरह का दर्द उठते समय या फिर ज़्यादा लंबे समय तक बैठने की वजह से बैचेन कर सकता है। कभी-कभी तो इसका प्रभाव छींकते या खांसते वक्त भी देखने को मिलतासाइटिका के लक्षण
अब बात की जाए साइटिका के लक्षण की, ये आमतौर पर साईटिक नर्व के रास्ते में ही महसूस किए जाते हैं। इसका मतलब यह है कि यदि कोई व्यक्ति ऐसा दर्द महसूस कर रहा है जो कि पीठ के निचले हिस्से से होते हुए कूल्हे के क्षेत्र में और निचले अंगों में हो रहा है, तो ये आमतौर पर साइटिका ही है।
कुछ प्रमुख साइटिका के लक्षण इस प्रकार हैंः
1. कमर के निचले हिस्से में दर्द
2. कूल्हे में दर्द
3. ऐसा दर्द जो खड़े होने में बाधा डाले
4. मूत्राशय (bladder) और आंतों (bowel) को नियंत्रित करने में असक्षम होना
5. पैरों का सुन्न होना या उसमें कमज़ोरी महसूस होनासाइटिका के कारण
कई ऐसी चिकित्सा-संबंधी परिस्थतियां हैं जिनकी वजह से साईटिका को बढ़ावा मिलता है।
1. हर्नियेटेड डिस्क (Herniated Disc)
इसे आमतौर पर स्लिप डिस्क भी कहा जाता है। हमारी स्पाइनल काॅलम में उपस्थित हड्डियों के मध्य एक मुलायम चीज़ पाई जाती है जिसे डिस्क के नाम से जाना जाता है। ये हमारे लिए कई तरह से महत्त्वपूर्ण मानी जाती हैं। जैसे कि चलते वक्त, कुछ सामना उठाते समय ये हड्डियों को आपस में टकराने से रोकने का काम करती हैं। साथ ही हड्डियों को किसी प्रकार के दबाव या झटके से सुरक्षा करती हैं।
हमारी रीढ़ में उपस्थित डिस्क में दो भाग होते है जिसमें भीतरी हिस्सा नरम और बाहरी हिस्सा (outer ring) कठोर होता है। कुछ कारणों के तहत भीतरी हिस्सा बाहरी हिस्सा से बाहर निकल जाता है जिसे स्लिप डिस्क के नाम से पहचाना जाता है। साईटिका के कारणों में एक प्रमुख कारण हर्नियेटेड डिस्क या स्लिप डिस्क को माना जाता है।
2. स्पाइनल स्टेनोसिस (Spinal Stenosis)
जब स्पाइनल केनाल सकड़ी होने लगती है, उस स्थिति को स्पाइनल स्टेनोसिस कहा जाता है। इस तरह की अवस्था में रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है। स्पाइनल स्टेनोसिस साईटिका का कारण होने के साथ-साथ रीढ़ की एक गंभीर बीमारी भी मानी जाती है। आमतौर पर इस तरह की परेशानी बढ़ती उम्र वाले लोग महसूस करते हैं।
3. स्पोन्डिलोलिस्थेसिस (Spondylolisthesis)
यह रीढ़ की हड्डी से जुड़ी ऐसी स्थिति है जिससे कमर में दर्द की शिकायत आती है। यह तब उत्पन्न होती है जब कोई एक कशेरूका (vertebrae) जो कि पीठ की हड्डी है, अपनी जगह से खिसक कर उसके नीचे वाली कशेरूका पर चली जाती है। इसकी वजह से साईटिका के होने की संभावना बढ़ जाती है।
4. मांसपेशियों में ऐंठन (Muscles Spasm)
इस तरह की परिस्थति में एक या अधिक मांसपेशियों में अचानक जकड़न महसूस होती है। इसके द्वारा होने वाला दर्द परेशान कर देने वाला और गंभीर माना जाता है। मांसपेशियों में जकड़न भी साईटिका का कारण बन सकता है। साईटिक नर्व मांसपेशियों से गुज़रती है और इस तरह की एंेठन उसे दबा सकती है।
5. डीजनरेटिव डिस्क डिजी़ज़ (Degenerative Disc Disease)
यह आमतौर पर उम्र के साथ होने वाली एक प्राकृतिक अवस्था है। इसमें स्पाइनल काॅलम की कशेरूका में पाए जाने वाली एक या अत्यधिक डिस्क बिगड़ जाती हैं। इस स्थिति के कारण दर्द होने लगता है। इस परेशानी को पीठ के निचले हिस्से में दर्द होने के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है। अगर डीजनरेटिव डिस्क डिजी़ज़ के कारण पीठ के निचले हिस्से की नसों में जलन होती है, तो इस कारण साईटिका का दर्द हो सकता है।
6. स्पाइनल ट्यूमर (Spinal Tumor)
स्पाइनल ट्यूमर उस स्थिति को कहते हैं कि जब स्पाइनज काॅलम या स्पाइनल कोर्ड के इर्द-गिर्द या भीतर के टिशू की असामान्य वृद्धि होने लगती है। ये कैंसर के साथ या उसकी अनुपस्थिति में भी हो सकते हैं। दोनों ही परिस्थतियां साईटिका का कारण बन सकती हैं खासतौर से जब ये साईटिक नर्व या फिर पीठ के निचले हिस्से में हों।
7. ट्रोमा (Trauma)
कई बार वाहन की भिड़ंत, कुछ खेल-संबंधी गतिविधि या गिरने के कारण भी साईटिका का दर्द महसूस हो सकता है। इस तरह की परिस्थतियों के कारण नर्व को नुकसान पहंुच सकता है या फिर टूटी हुई हड्डी उस पर दबाव डाल सकती है।
इन बातों का पूर्ण रूप से ध्यान रखें। साथ ही साथ अपनी सेहत पर भी गौर करें। मेडिकल चिकित्सा से जुड़ी सुविधाओं के लिए मेवाड़ हास्पीटल से संपर्क करें।गर्भावस्था (Pregnancy) और साइटिका
गर्भावस्था के समय साईटिका का प्रभाव एक आम बात मानी जाती है। ये लिगामेन्ट के ढीले होने के कारण भी हो सकता है क्योंकि ऐसी स्थिति में रीढ़ की हड्डी अस्थिर हो जाती है और नसों में असामान्य अनुभूति होती है। बच्चे के वज़न और उसकी जगह के कारण भी नसों पर जा़ेर पड़ सकता है। हालांकि कुछ विकल्प हैं जिनकी बुनियाद पर गर्भावस्था में होने वाले इस तरह के दर्द से छुटकारा मिल सकता है और बच्चे की पैदाइश के बाद दर्द होना बंद हो जाता है।साइटिका की पहचान करने हेतु विकल्प
यदि आप इस तरह का दर्द महसूस कर रहे हैं, तो मेवाड़ हाॅस्पीटल के कुशल डाॅक्टर्स से संपर्क करें। साईटिका की पहचान के लिए फिजिकल एग्जा़म की आवश्यकता पड़ सकती है। साथ ही आपको अपनी मेडिकल हिस्ट्री के बारे में भी बताना पड़ सकता है। साईटिका के कारण को जानने के लिए कुछ टेस्ट उपलब्ध हैं, जैसे किः-
1. एक्स रे (X-Ray) – ये शरीर के अंदर की इमेज प्रदान करता है और बाॅन स्पर्स (bone spurs) की पहचान करने के लिए एक अच्छा विकल्प माना जाता है।
2. सी.टी. स्कैन (C.T. Scan) – इसके द्वारा स्पाइनल कोर्ड और नसों की परिस्थति का बेहतर रूप से अंदाज़ा लग जाता है।
3. एम.आर.आई. (M.R.I.) – ये रेडियो वेव और चुंबकीय पद्धति के उपयोग से अंदरूनी शरीर की ईमेज दर्शाता है। इसके माध्यम से रीढ़ की हड्डी के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
4. इलेक्ट्रोमायोग्राफी (Electromyography) – ये हर्निएटेड डिस्क का पता लगाने के लिए काम आ सकता है।साइटिका का ईलाज
कई ऐसे मौके होते हैं जिसमें साईटिका से पीड़ित होने वाला व्यक्ति बिना डाॅक्टर की सहायता लिए कुछ नुस्खों के माध्यम से ठीक हो जाता है। फिर भी कई ऐसे लोग हैं जिनका दर्द बरकरार रहता है और उन्हें डाॅक्टर से सलाह लेना ज़रूरी हो जाता है। आप मेवाड़ हाॅस्पिटल के डाॅक्टर्स से बात कर सकते हैं जो प्रारंभिक समय में कुछ दवाईयों के सेवन की सलाह दे सकते हैं।
कुछ मौकों में व्यायाम की भी सलाह दी जा सकती है। खासतौर से वे जिनके माध्यम से पाॅस्चर में सुधार और फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती हो। कभी कभी साईटिका का प्रभाव ज़्यादा बढ़ने पर स्टेरोइड इंजेक्शन की सहायता भी लेनी पड़ती है। ये नसों के इर्द-गिर्द सूजन को कम करती है जिससे दर्द में आराम मिलता है। लेकिन इसका असर कुछ महीनों तक ही रहता है।
सर्जरी
साईटिका का ईलाज सर्जरी के माध्यम से भी हो सकता है। ये उन मौकोें पर काम आती है जब मरीज़ को दर्द में आराम नहीं मिलता, उसे कमज़ोरी होने लगती है या फिर उसका मूत्राशय पर नियंत्रण नहीं रहता। सर्जरी के दौरान डाॅक्टर बाॅन स्पर या फिर हर्निएटेड डिस्क को निकाल देते हैं जिसके कारण नसों पर दबाव होने की वजह से दर्द महसूस हो रहा हो। सर्जरी के बारे में पूर्ण रूप से जानकारी प्राप्त करने के लिए आप मेवाड़ हाॅस्पिटल के वरिष्ठ सर्जन से बात कर सकते हैं।साइटिका में स्वयं की देखभाल के उपाय
साईटिका होने पर आप बर्फ या गर्म सेक की सहायता ले सकते हैं। बर्फ के सेक के माध्यम से सूजन और दर्द में आराम मिल सकता है। जिस जगह आप असहजता महसूस कर रहे हैं, उस जगह पर बर्फ के सेक को लगभग 20 मिनिट तक लगाए रखें। ऐसा दिन में कुछ बार करने से आराम मिलने की संभावना है। उसके बाद गर्म सेक की मदद लें और हीटिंग पैड के माध्यम से उसे भी उतने ही समय के लिए लगाए रखें। अगर इसके बावजूद भी दर्द से छुटकारा नहीं मिलता तो दोनों पैक को चेन्ज करते रहें और यदि दोनों में कोई एक ही फायदा दे रहा है तो उसे ही इस्तेमाल में लें। लेकिन यह बेहतर होगा कि इस तरह की गतिविधियों को अपनाने से पहले आप डाॅक्टर या फिज़िकल थैरेपिस्ट की सलाह लें।
याद रखें
यदि कोई व्यक्ति पीठ में मोच, हर्निएटेड डिस्क या फिर लम्बार डीजनरेटिव डीजीज (lumbar degenerative disease) से ग्रस्त है, तो ऐसी स्थिति में साईटिका अस्थाई रहेगा। लेकिन फिर भी यह बता पाना मुश्किल है कि आखिर कितने दिन या हफ्ते तक इसका प्रभाव रहेगा। कुछ एक्सपर्ट्स के मुताबिक साईटिका का दर्द आमतौर पर चार से छः हफ्तों में बेहतर होना शुरू हो जाता है। पर यदि बात की जाए सुन्नता और कमज़ोरी की, इसे बेहतर होने में एक लंबा समय लग सकता है।
कभी कभी ऊपर बताई गई अवस्थाओं के कारण साईटिका भयावह स्थिति में भी आ सकता है। कुछ मौके ऐसे भी होते हैं जहां बिना सर्जरी की सहायता के दर्द में आराम मिल ही नहीं पाता। यदि कभी आपको कोई चोट लगे या किसी तरह के एक्सीडेन्ट के कारण दर्द महसूस हो रहा हो, तो शीघ्र ही मेडिकल सहायता लें।बेहतर सुविधाओं और उपचार हेतु मथुरा में सम्राट हेल्थकेयर में पधारें
हमारी टीम साइटिका से जुड़ी परामर्श सेवाओं के लिए हाज़िर है। हालांकि कुछ विकल्पों की मदद से आप इसके रिस्क को कम कर सकते हैं। ज़रूरी नहीं कि इससे जुड़े संपूर्ण मामलों में राहत मिले, लेकिन आप कुछ बातों को ध्यान में रखें। जैसे कि बैठते समय सही पाॅस्चर बनाना जिसकी वजह से पीठ के निचले हिस्से पर प्रेशर कम पड़े। इसके अलावा अपने वज़न को संतुलित रखें एवं स्वास्थ्य के अनुकूल भोजन का सेवन करें। साथ ही जो लोग धुम्रपान और शराब का सेवन करते हैं, वे ऐसी आदतों को त्याग कर रोज़ाना व्यायाम करने की कोशिश करें। यदि इन बातों को फोलो करने के बाद भी आपको किसी तरह की परेशानी होती है, तो कृपया हमें ज़रूर संपर्क करें।
30/03/2023
राम नवमी की हार्दिक शुभकामनाएं आप सभी को 30-03-2023 SAMRAT HEALTHCARE
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