Gausiya Enterprises

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Ayurvedic medicine & treatment

17/08/2026

*अडूसा-3* के फायदे व उपयोग :
1. क्षय (टी.बी.) :

अडूसा के फूलों का चूर्ण 10 ग्राम की मात्रा में लेकर इतनी ही मात्रा में मिश्री मिलाकर 1 गिलास दूध के साथ सुबह-शाम 6 माह तक नियमित रूप से खिलाएं।
अडूसा (वासा) टी.बी. में बहुत लाभ करता है इसका किसी भी रूप में नियमित सेवन करने वाले को खांसी से छुटकारा मिलता है। कफ में खून नहीं आता, बुखार में भी आराम मिलता है। इसका रस और भी लाभकारी है। अडूसे के रस में शहद मिलाकर दिन में 2-3 बार देना चाहिए।
वासा अडूसे के 3 लीटर रस में 320 ग्राम मिश्री मिलाकर धीमी आंच पर पकायें जब गाढ़ा होने को हो, तब उसमें 80 ग्राम छोटी पीपल का चूर्ण मिलायें जब ठीक प्रकार से चाटने योग्य पक जाय तब उसमें गाय का घी 160 ग्राम मिलाकर पर्याप्त चलायें तथा ठंडा होने पर उसमें 320 ग्राम शहद मिलायें। 5 ग्राम से 10 ग्राम तक टी.बी. के रोगी को दे सकते हैं। साथ ही यह खांसी, सांस के रोग, कमर दर्द, हृदय का दर्द, रक्तपित्त तथा बुखार को भी दूर करता है।
वासा के रस में शहद मिलाकर पीने से अधिक खांसी युक्त श्वास में लाभ होता है। यह क्षय, पीलिया, बुखार और रक्तपित्त में लाभकारी होता है।
अडूसा की जड़ की छाल को लगभग आधा ग्राम से 12 ग्राम या पत्ते के चूर्ण लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग तक खुराक के रूप में सुबह और शाम शहद के साथ सेवन करने से लाभ होता हैं।
2. दमा :

अड़ूसा के सूखे पत्तों का चूर्ण चिलम में भरकर धूम्रपान करने से दमा रोग में बहुत आराम मिलता है।
अडूसा के ताजे पत्तों को सुखाकर उनमें थोड़े से काले धतूरे के सूखे हुए पत्ते मिलाकर दोनों के चूर्ण का धूम्रपान (बीड़ी बनाकर पीने से) करने से पुराने दमा में आश्चर्यजनक लाभ होता है।
यवाक्षार लगभग आधा ग्राम, अडू़सा का रस 10 बूंद और लौंग का चूर्ण लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से लाभ मिलता है।
लगभग आधा ग्राम अर्कक्षार या अड़ूसा क्षार शहद के साथ भोजन के बाद सुबह-शाम दोनों समय देने से दमा रोग ठीक हो जाता है।
श्वास रोग (दमा) में अडू़सा (बाकस), अंगूर और हरड़ के काढ़े को शहद और शर्करा में मिलाकर सुबह-शाम दोनों समय सेवन करने से लाभ मिलता है।
श्वास रोग (दमा) में अड़ूसे के पत्तों का धूम्रपान करने से श्वास रोग ठीक हो जाता है।
पूरी पोस्ट पढ़े
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15/08/2026
08/07/2026

*खराब हाजमा और बीमारियां- 1*

*संधिवात के कारण*

आज के दौर की सबसे बड़ी कड़वी सच्चाई यही है। जिसे आधुनिक विज्ञान 'लाइफस्टाइल डिसऑर्डर' कहता है, उसे ही आयुर्वेद और यूनानी में **'प्रज्ञापराध'** (जानबूझकर की गई गलती) और **'विरुद्ध आहार'** का नतीजा माना गया है।
जब खाने-पीने का कोई नियम नहीं रहता, तो शरीर का पूरा निजाम दरहम-बरहम (असंतुलित) हो जाता है। आइए देखें कि आज की यह खराब लाइफस्टाइल और खान-पान जोड़ों को किस तरह खोखला कर रहे हैं:
# # # 1. मंदाग्नि और 'आम' (Toxins) का निर्माण
आजकल लोग भूख लगे बिना खा लेते हैं, देर रात भारी खाना खाते हैं, या फिर मैदा, डिब्बाबंद (Processed) भोजन और फास्ट फूड का कसरत से इस्तेमाल करते हैं।
* **नतीजा:** इससे पेट की अग्नि (Metabolism) मंद पड़ जाती है। खाना पचने की बजाय सड़ने लगता है, जिससे **'आम' (Toxins)** पैदा होता है। यही 'आम' जब खून के जरिए जोड़ों में पहुंचता है, तो **आमवात (Rheumatoid Arthritis)** की शक्ल अख्तियार कर लेता है।
# # # 2. विरुद्ध आहार (Wrong Food Combinations)
दूध के साथ मछली या नमक का सेवन, ठंडी और गर्म चीजें एक साथ खाना (जैसे गरमा-गरम समोसे के साथ ठंडी कोल्ड ड्रिंक), या फल और दूध को मिलाकर 'मिल्कशेक' पीना—ये सब आयुर्वेद में **विरुद्ध आहार** माने गए हैं।
* **नतीजा:** यह सीधे तौर पर खून को दूषित करता है। यूनानी के नजरिए से देखें तो यह 'अखलात' (Humors) को बिगाड़ता है, जिससे **वातरक्त (Gout/यूरिक एसिड)** जैसी बीमारियां तेजी से पनपती हैं।
# # # 3. रात का जागना और दिन का सोना (Improper Sleep Cycle)
देर रात तक स्क्रीन (मोबाइल/लैपटॉप) के सामने जागना शरीर में **रूक्षता (Dryness) और वात दोष** को बेतहाशा बढ़ाता है।
* **नतीजा:** इसके कारण जोड़ों के बीच का नेचुरल लुब्रिकेंट (Shleshaka Kapha या Synovial Fluid) समय से पहले सूखने लगता है, जिससे कम उम्र में ही लोगों को **वातज संधिवात (Osteoarthritis)** और रीढ़ की हड्डी (Spondylitis) की तकलीफें घेर रही हैं।
# # # 4. शारीरिक निष्क्रियता (Sedentary Lifestyle)
घंटों एक ही जगह बैठे रहना, पैदल न चलना और कोई कसरत न करना।
* **नतीजा:** जब शरीर में हरकत नहीं होती, तो जोड़ों के आसपास की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और कफ दोष बढ़ने लगता है। नतीजा—**कफज संधिवात**, जोड़ों में भारीपन और जकड़न।
**हिकमत

08/07/2026

How find out your BLO?
आप के BLO को डूड के आप अपने फॉर्म भर लीजिए ये आप की नैतिक जिम्मेदारी है

27/06/2026

*अक्सर नाखून सफेद और चेहरे पर सफेदी होती है ये खास लक्षण होते है*

*आप फोटो में देख सकते है पहले नाखून सफेद थे अब इलाज के बाद लाल हो गए है*

*खून की कमी (Anemia/रक्तक्षय)* होने पर शरीर के अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे कई गंभीर बीमारियां और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
खून की कमी से होने वाले मुख्य रोग और जटिलताएं निम्नलिखित हैं:
# # # **1. प्रमुख प्रकार के एनीमिया (Main Types of Anemia)**
* **आयरन की कमी (Iron Deficiency Anemia):** यह सबसे सामान्य है। शरीर में आयरन कम होने से हीमोग्लोबिन नहीं बन पाता।
* **विटामिन की कमी (Vitamin Deficiency Anemia):** विटामिन B12 और फोलेट (Folic Acid) की कमी से लाल रक्त कोशिकाएं (RBC) ठीक से नहीं बन पातीं। इसे **पर्निसियस एनीमिया** (Pernicious Anemia) भी कहते हैं।
* **सिकल सेल एनीमिया (Sickle Cell Anemia):** यह एक आनुवंशिक (Genetic) बीमारी है जिसमें खून की कोशिकाएं दरांती (Sickle) के आकार की हो जाती हैं और जल्दी नष्ट होने लगती हैं।
* **अप्लास्टिक एनीमिया (Aplastic Anemia):** इसमें शरीर की अस्थि मज्जा (Bone Marrow) नई रक्त कोशिकाएं बनाना बंद कर देती है।
# # # **2. शरीर पर होने वाले अन्य प्रभाव (Secondary Health Issues)**
खून की कमी लंबे समय तक बनी रहे तो ये बीमारियां हो सकती हैं:
* **हृदय रोग (Heart Problems):** खून की कमी को पूरा करने के लिए दिल को ज्यादा पंप करना पड़ता है, जिससे **Heart Failure** या दिल का आकार बढ़ने की समस्या हो सकती है।
* **कमजोर इम्यूनिटी (Weak Immunity):** शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
* **थकान और मानसिक कमजोरी:** हमेशा सुस्ती रहना, एकाग्रता (Concentration) में कमी और याददाश्त पर असर पड़ना।
* **गर्भावस्था में जोखिम:** गर्भवती महिलाओं में खून की कमी से समय से पहले प्रसव (Premature birth) या शिशु का वजन कम होने का खतरा रहता है।
* **बच्चों में विकास की कमी:** बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास धीमा पड़ सकता है।
# # # **प्रमुख लक्षण (Symptoms to Watch)**
यदि आपको ये लक्षण दिखें, तो यह रक्त की कमी का संकेत हो सकते हैं:
पूरी पोस्ट पढ़े
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https://aboutharbs.blogspot.com/2026/04/anemia.html

Photos from Gausiya Enterprises's post 19/06/2026

वक्त साथ न दे ,घर की हालत ठीक न हो ,चाहे गरेज में काम करना हो , चपरासी का काम हो, डिलीवरी बॉय का काम हो या , ऑफिस बॉय का काम हो ....जो भी हो वक्त के हालात के सामने न झुके पड़ते रहिए ,क्यों की शिक्षा आप को इंसान बनाएगी और दूसरे इंसान को समझने वाला बनाएगी.....अगर उच्च शिक्षा कर के भी जो दुसरो को समझ नही पाए वो सिख तो गए पर इंसान नही बन पाए

10/06/2026

100% Cure. No Empty Promises

हम 100% इलाज करते है
सिर्फ प्रचार नही करते
watch video by feedback of piles petiont

08/05/2026

*सूरन (जिमीकंद) के लाजवाब फायदे*

सूरन (suran) जमीन में होने वाली कन्द है, इसलिए इसे `जमीकन्द´ कहते है। सूरन के पौधे बिना तने के बड़े-बडे पत्तों वाले होते हैं। इसके कन्द में पन्खुडियां बाहर निकलती है और ऊपर जाते-जाते इसके पत्ते छाते की तरह विशाल रूप धारण कर लेती है। सूरन दो तरह की होती है। पहली खुजली वाली और दूसरी मीठी वाली। खुजली वाली सूरन का सेवन करने से मुंह में चरपराहट होती है और मुंह सूज जाता है। इस तरह का सूरन का कन्द चिकना होता है और उसका सन्वर्धन कद के छोटे-छोटे टुकड़े करके होते है।

यह मुंह और गले में चराचराहट करती है। इसकी पैदावर अधिक होती है। इसको उबालने से उसकी चराचराहट कम होती है। मीठी किस्म का सूरन का संवर्धन उपकन्दों से होता है। मीठी किस्म का गुण ज्यादा अच्छा होता है। इससे चराचराहट नही होती है। इसके गर्भ का रंग फीका गुलाबी अथवा सफेद होता है। मीठी तरह का सूरन साग के लिए और चराचराहट वाली सूरन का औषधि के रूप में उपयोग होता है।

मस्से यानि बवासीर के रोग में यह बहुत ही गुणकारी है। इसीलिए संस्कृत भाषा में इसे अर्शहन का नाम दिया गया है। सूरन(suran) का साग बवासीर के रोगियों के लिए लाभकारी होता है।

वैज्ञानिक के अनुसार : सूरन में कैल्शियम, फास्फोरस, लौह, प्रोटीन एवं अधिक मात्रा में विटामिन `ए´ है।

*सूरन (जिमीकंद) के फायदे और उपयोग (suran ke fayde in hindi)*
1. बवासीर में रामबाण :

सूरन (suran)के टुकड़ों को पहले उबाल लें और फिर सुखाकर उनका चूर्ण बना लें | यह चूर्ण 320 ग्राम, चित्रक 160 ग्राम, सौंठ 40 ग्राम, काली मिर्च 20 ग्राम एवं गुड 1 किला – इन सबको मिलाकर देशी बेर जैसी छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें | इसे ‘सूरन वटक’ कहते हैं | प्रतिदिन सुबह-शाम 3-3 गोलियाँ खाने से बवासीर में खूब लाभ होता हैं |
सूरन (jimikand)के टुकड़ों को भाप में पका लें और टिल के तेल में सब्जी बनाकर खायें एवं ऊपर से छाछ पियें | इससे सभीप्रकार की बवासीर में लाभ होता हैं | यह प्रयोग 30 दिन तक करें। खूनी बवासीर में सूरन की सब्जी के साथ इमली की पत्तियाँ एवं चावल खाने से लाभ होता हैं ।
2. पेट के कीड़ों के लिए : सूरन का प्रयोग करने से पेट के कीड़े और बवासीर की शिकायत मिट जाती है।
पुरी पोस्ट पडीये
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*सावधनिय

28/04/2026

ये पोस्ट नए मेंबर के लिए दोबारा भेजी जा रही है पिछले साल ये भेजी गई थी

*Fight with globle worming/बढ़ती ग़रमी से कैसे लढेन के उपायए*

(1) खस् (Vetiver Farming)
ये खस् खस् नही सिर्फ खस् नाम का पौधा है जिंसकि जड़ पंसारी के यहा मल्ती है वो पाणी में भिगोना है (3 घंटे 3 hours) इसकी तासीर थंडी होती है ये शरीर को गर्म होने से रोखता है और खाना पाचन को भी मदद कार् ता है
(2) *धनिया बिज*(Coriandrum sativum) की पाऊडर 1 चमच(1tea spoon)
*सौंफ* (Foeniculum vulgare) की पाऊडर 1 चमच(1tea spoon)
*आमला /आँवला* (Phyllanthus emblica) 1 चमच(1 tea spoon)
इन सब को 1 लिटर पाणी में 3 घंटे(3hours) भिगो दीजिये और इसमें शक्कर सवाद नुसार मिला दीजिये

थोडी *खट्टी ईमली ( टैमारिंडस इंडिका )*अगल* से 3 घंटे (3hours) भिगो दीजिये
3 घंटे बाद ये मिश्रण मिला कर आप पिना शुरू कीजिये
इस् से गरमी से होने वाले बुखार, लू, लूज़ मोशन, गरमी से होनेवाले तमाम बिमारी से राहत मिलती है

(3) *सौंफ*(Foeniculum vulgare) + *ईमली ( टैमारिंडस इंडिका )*अलग अलग भि गो कर मिलाकेर पीजीये और सवाद नु सार् शक्कर मिलाइये
(4) धनिया बिज की पाऊडर (Coriandrum sativum) + शक्कर + ईमली
याद रखिये ईमली जो खट्टी होती है वो मिश्रण को खाराब कर सकते हैं इसलिये ईमली को अलग से भिगोये और इस्तेमाअल् करते वकत् मिलाइये
स्वस्थ रहिये सुखी रहिये
आयुर्वेद को अपनाये
उपर लिखे उपाय में से कोई *एक उपाय कीजिए*
सब नही करना है
*ये पोस्ट सिर्फ जानकारी के लिए हैं कोई भी जड़ी बूटियां इस्तेमाल से पहले अपने हकिम या वैद्य से जानकारी जरूर लीजिए पोस्ट के दुरुपयोग के लिए गौसिया एंटरप्राइजेज - हकिम जमीर शेख जिम्मेदार नहीं*
*_(खुद से दवाइया/जड़ी बूटियां इस्तेमाल करना हानिकार हो सकता है)_*
_*आयुर्वेदिक सलाह और उपचार के लिये संम्पकर करे*_

*_Dr. Jamir S. Shaikh_*
*D.U.M.S.*
(MLVV_ Delhi)

*9370491556*
*गौसिया एन्टरप्राइसेस /गौसिया आयुर्वेदालय*
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