Shiv Shankar
shiv Shankar
भस्म आरती के नियम और ड्रेस कोड
महाकाल मंदिर में भस्म आरती में शामिल होने के लिए भक्तों को एक निश्चित ड्रेस कोड (परिधान नियम) का पालन करना अनिवार्य होता है:
पुरुषों के लिए: केवल धोती (सोला) पहनना अनिवार्य है। ऊपर का शरीर खाली (बिना सिले वस्त्र के) होना चाहिए।
महिलाओं के लिए: पारंपरिक साड़ी पहनना अनिवार्य है।
नियम: आरती के उस विशेष क्षण में, जब बाबा महाकाल को सीधे भस्म चढ़ाई जाती है, महिलाओं को कुछ देर के लिए घूंघट करने (चेहरा ढकने) को कहा जाता है।
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आरती का समय और स्वरूप
समय: यह आरती प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त में, सुबह 04:00 बजे से 06:00 बजे तक आयोजित की जाती है।
परंपरा: मान्यता है कि भगवान शिव श्मशान के निवासी हैं और भस्म उनका मुख्य श्रृंगार है। इस आरती के ज़रिए बाबा महाकाल को जगाया जाता है और उनका दिव्य श्रृंगार किया जाता है।
विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला: हर साल सावन के महीने में यहाँ एशिया का सबसे लंबा चलने वाला धार्मिक मेला लगता है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु सुल्तानगंज (बिहार) से गंगाजल लेकर लगभग 105 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा (कांवड़ यात्रा) करते हुए बाबा को जल अर्पित करने देवघर पहुँचते हैं।
देवघर वाले विश्वनाथ महादेव आमतौर पर झारखंड के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ (वैद्यनाथ) ज्योतिर्लिंग को कहा जाता है। हालांकि "विश्वनाथ" नाम मुख्य रूप से काशी (वाराणसी) के महादेव के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन देवघर के बाबा धाम को भी ब्रह्मांड के स्वामी के रूप में अत्यंत श्रद्धा से "विश्वनाथ" या "बैद्यनाथ" पुकारा जाता है।
बाबा बैद्यनाथ धाम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसका इतिहास एवं महत्व बेहद निराला है।
1. पौराणिक कथा और स्थापना (रावण की कथा)
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, लंकापति रावण ने हिमालय पर घोर तपस्या करके भगवान शिव को प्रसन्न किया था। वह महादेव को हमेशा के लिए अपने साथ लंका ले जाना चाहता था।
शिवजी ने रावण को एक शिवलिंग दिया और शर्त रखी कि लंका पहुंचने से पहले इसे कहीं भी जमीन पर मत रखना, अन्यथा यह वहीं स्थापित हो जाएगा।
देवघर पहुंचने पर रावण को लघुशंका (यूरिन) की तीव्र इच्छा हुई। उसने वहां मौजूद एक ग्वाले (जो वास्तव में भगवान विष्णु के अवतार देवर्षि नारद या वरुण देव थे) को शिवलिंग थमा दिया।
शिवलिंग का वजन अचानक बहुत बढ़ गया और ग्वाले ने उसे जमीन पर रख दिया। इस तरह भगवान शिव वहीं स्थापित हो गए और वह स्थान 'देवघर' (देवताओं का घर) कहलाया।
2. वैद्यनाथ नाम क्यों पड़ा?
वेलकम टू द जंगल" (Welcome To The Jungle) की बात कर रहे हैं (जो असल में 'वेलकम' फ्रेंचाइजी की तीसरी फिल्म है, लेकिन कई लोग इसे '2' या अगला पार्ट कह देते हैं), तो यह बॉलीवुड की एक बहुत बड़ी मल्टी-स्टारर कॉमेडी फिल्म है जो हाल ही में 26 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है।
हर हर महादेव! 🙏
शिव शंकर, भोलेनाथ, देवों के देव महादेव की महिमा अपरंपार है। वे अनादि और अनंत हैं—वही सृष्टि के कण-कण में वास करते हैं।
महादेव के चरणों में एक सुंदर स्तुति:
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥
अर्थ: जो कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के अवतार हैं, इस संसार के सार हैं और जो अपने गले में सर्पों का हार धारण करते हैं, वे भगवान शिव माता पार्वती सहित मेरे हृदय में सदा निवास करें। उन्हें मेरा प्रणाम है।
जय भोलेनाथ! हर हर महादेव। 🙏
भगवान शिव, जिन्हें हम शिव शंकर, महादेव, और भोलेनाथ जैसे अनेक पवित्र नामों से पुकारते हैं, वे देवों के देव हैं। वे आदि और अनंत हैं, कल्याणकारी हैं, और अपने भक्तों पर बहुत जल्दी प्रसन्न होने वाले 'भोले भंडारी' हैं।
आप महादेव के विषय में क्या जानना या चर्चा करना चाहते हैं?
महादेव के मंत्र या स्तोत्र (जैसे महामृत्युंजय मंत्र या शिव तांडव स्तोत्र)
शिवरात्रि या सावन सोमवार की पूजा विधि
महादेव से जुड़ी कोई पौराणिक कथा या उनका आध्यात्मिक महत्व
सुबह-सुबह महादेव का नाम लेने से पूरा दिन सकारात्मकता, शांति और नई ऊर्जा से भर जाता है। भगवान शिव की कृपा आप पर और आपके परिवार पर हमेशा बनी रहे। आपका आज का दिन अत्यंत मंगलमय और कल्याणकारी हो!
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