National Koli News

National Koli News

Share

Digital media

13/07/2026

ಭಾರೀ ಬೇಡಿಕೆಯಿಂದ ಕೊತ್ತಂಬರಿ ಬೆಲೆಯಲ್ಲಿ ಭಾರೀ ಏರಿಕೆ
2 ಕಟ್ಟು ಕೊತ್ತಂಬರಿ ₹210 – ಗ್ರಾಹಕರಿಗೆ ಬೆಲೆ ಏರಿಕೆಯ ಶಾಕ್!
ನಾಸಿಕ್‌ನಲ್ಲಿ ಕೊತ್ತಂಬರಿ ಬೆಲೆ ಗಗನಕ್ಕೇರಿ ಜನರಿಗೆ ಆತಂಕ

13/07/2026

नासिक में धनिया महंगा! 2 गड्डी की कीमत पहुंची ₹210,
भारी मांग और सीमित आपूर्ति के कारण धनिया के दाम में जबरदस्त उछाल, आम लोगों की जेब पर बढ़ा बोझ।

13/07/2026

क्या आपने कभी कल्पना की है कि ऐसा भी क्षण आया होगा जब स्वयं वैकुण्ठ के द्वार भगवान विष्णु के लिए बंद कर दिए गए हों? जहाँ देवता सिर झुकाकर खड़े हों, गंधर्वों का संगीत थम गया हो और संपूर्ण वैकुण्ठ में गहरा मौन छा गया हो। यह कोई साधारण घटना नहीं थी। यह उस समय की कथा है जब स्वयं माता लक्ष्मी ने अपने आराध्य श्रीहरि के सामने एक ऐसा निर्णय रखा जिसने तीनों लोकों को यह समझा दिया कि ईश्वर की सबसे बड़ी शक्ति केवल न्याय नहीं, बल्कि करुणा भी है।

वैकुण्ठ लोक उस दिन अपनी दिव्य शोभा से आलोकित था। स्वर्णिम महलों पर पड़ती प्रकाश की किरणें चारों दिशाओं में अद्भुत आभा फैला रही थीं। देवगण अपने-अपने कार्यों में व्यस्त थे। गंधर्व भगवान के गुणों का मधुर गान कर रहे थे और अप्सराएँ दिव्य नृत्य में लीन थीं। सब कुछ सामान्य था, तभी अचानक वैकुण्ठ के मुख्य द्वार पर माता लक्ष्मी का गंभीर स्वर गूँज उठा। उन्होंने दृढ़ वाणी में कहा, "प्रभु, आज आप इन द्वारों के भीतर तब तक प्रवेश नहीं करेंगे, जब तक पृथ्वी पर आपका एक भक्त जीवन और मृत्यु के बीच तड़पता रहेगा। यदि उसके लिए आपका हृदय नहीं पिघलता, तो इस वैकुण्ठ में आपके लिए भी स्थान नहीं है।"

उनके ये शब्द सुनते ही पूरा वैकुण्ठ स्तब्ध रह गया। देवता एक-दूसरे का मुख देखने लगे। किसी ने आज तक माता लक्ष्मी को इतने दृढ़ स्वर में बोलते नहीं सुना था। स्वयं भगवान विष्णु शांत भाव से द्वार पर खड़े थे। उनके मुख पर मुस्कान थी, पर आँखों में गहराई थी। आखिर ऐसा कौन-सा भक्त था जिसके लिए स्वयं लक्ष्मी जी अपने प्रभु के सामने अडिग होकर खड़ी हो गई थीं?

उस समय पृथ्वी भयंकर अकाल से गुजर रही थी। वर्षों से वर्षा नहीं हुई थी। खेतों की मिट्टी फट चुकी थी। नदियाँ सूख गई थीं। पशु-पक्षी प्यास से व्याकुल होकर इधर-उधर भटक रहे थे। गाँवों में चूल्हे बुझ चुके थे और लोगों की आँखों से उम्मीद का प्रकाश धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा था। हर ओर केवल अभाव, भूख और निराशा का साम्राज्य था।

इसी कठिन समय में एक छोटे से गाँव में हरिदास नाम का वृद्ध भक्त रहता था। उसका जीवन अत्यंत सरल था। उसने कभी किसी का अधिकार नहीं छीना, कभी असत्य का सहारा नहीं लिया और कभी भगवान का नाम लेना नहीं छोड़ा। उसकी सबसे बड़ी संपत्ति केवल एक छोटी-सी नारायण की प्रतिमा और प्रभु पर अटूट विश्वास था। हर सुबह वह काँपते हाथों से दीप जलाता और कहता, "प्रभु, आज का दिन भी आपकी कृपा से आरंभ हो।"

लेकिन समय ने उसके धैर्य की भी परीक्षा लेनी शुरू कर दी। कई दिनों तक उसे भोजन नहीं मिला। धीरे-धीरे उसके शरीर की शक्ति समाप्त होने लगी। उसकी झोपड़ी में न अन्न बचा, न जल। फिर भी उसके होंठों पर शिकायत का एक भी शब्द नहीं आया। वह केवल आँखें बंद करके भगवान का नाम जपता रहता और कहता, "प्रभु, यदि यह भी आपकी इच्छा है, तो मुझे स्वीकार है।"

वैकुण्ठ में बैठे भगवान विष्णु अपने भक्त की हर पीड़ा देख रहे थे। वे जानते थे कि यह सब उसके पूर्व जन्मों के कर्मों का परिणाम है। सृष्टि का नियम अटल है। कर्म का फल प्रत्येक जीव को भोगना ही पड़ता है। इसलिए वे मौन रहे।

परंतु माता लक्ष्मी का हृदय दया से भर उठा। उन्होंने श्रीहरि की ओर देखकर कहा, "प्रभु, जिसने जीवन भर केवल आपका स्मरण किया, जिसने कभी किसी का बुरा नहीं सोचा, क्या उसे इस प्रकार तड़पना चाहिए? क्या भक्ति का यही फल है?"

भगवान विष्णु ने शांत स्वर में उत्तर दिया, "देवि, मैं उसके दुःख को देख रहा हूँ। परंतु यदि मैं आज कर्म के नियम को तोड़ दूँ, तो सृष्टि का संतुलन डगमगा जाएगा। न्याय सभी के लिए समान होना चाहिए।"

माता लक्ष्मी की आँखों में आँसू आ गए। उन्होंने कहा, "जब गजेन्द्र ने पुकारा था, तब आपने क्षण भर का भी विलंब नहीं किया। जब द्रौपदी ने आपको स्मरण किया, तब आपने सभी मर्यादाएँ भुला दीं। जब-जब भक्त संकट में पड़ा, आपने नियमों से ऊपर उठकर उसकी रक्षा की। फिर आज यह भक्त क्यों अकेला छोड़ दिया गया?"

पूरे वैकुण्ठ में गहरा मौन छा गया। देवताओं ने पहली बार करुणा और न्याय का ऐसा संवाद देखा था। कुछ क्षणों तक भगवान विष्णु मौन रहे। तब माता लक्ष्मी ने वैकुण्ठ के द्वार बंद करने का आदेश दिया और दृढ़ स्वर में बोलीं, "आज आप भगवान बनकर नहीं, सेवक बनकर पृथ्वी पर जाएँगे। जब तक उस भक्त की पीड़ा कम नहीं होगी, तब तक इन द्वारों से आपका प्रवेश नहीं होगा।"

भगवान विष्णु मुस्कुरा उठे। उन्होंने अपना शंख, चक्र, गदा और पद्म वहीं रख दिए। अगले ही क्षण उनका दिव्य स्वरूप बदल गया। अब वे एक साधारण यात्री के रूप में दिखाई दे रहे थे। उनके शरीर पर साधारण वस्त्र थे, कंधे पर छोटी-सी पोटली थी, हाथ में लकड़ी की लाठी और चेहरे पर एक थके हुए मुसाफिर की सहज मुस्कान।

वे पृथ्वी पर पहुँचे और उस गाँव की ओर चल पड़े जहाँ हरिदास अपनी अंतिम साँसों की प्रतीक्षा कर रहा था। रास्ते भर उन्होंने भूख से व्याकुल बच्चों को देखा, सूखी धरती देखी, प्यासे पशुओं को देखा और लोगों की विवशता को अपनी आँखों से अनुभव किया। अंततः वे उस छोटी-सी झोपड़ी के सामने पहुँचे।

उन्होंने धीरे से आवाज़ लगाई, "बाबा... कोई है?"

भीतर से कमजोर स्वर सुनाई दिया, "बेटा, यदि भोजन माँगने आए हो तो क्षमा करना। मेरे पास स्वयं खाने को कुछ नहीं है।"

यात्री मुस्कुराया। उसने अपनी छोटी-सी पोटली खोली। उसमें साधारण-सा भोजन था, पर उसकी सुगंध पूरे वातावरण को पवित्र कर रही थी। वह हरिदास के पास बैठ गया और अपने हाथों से उसे पहला ग्रास खिलाया। जैसे ही भोजन उसके मुख में गया, उसे ऐसा अनुभव हुआ मानो शरीर में नई शक्ति का संचार होने लगा हो। उसके चेहरे पर वर्षों बाद मुस्कान लौट आई।

कुछ देर बाद हरिदास ने उस यात्री का हाथ पकड़कर कहा, "तुम कोई साधारण मनुष्य नहीं हो। तुम्हारे स्पर्श में वही शांति है जिसे मैं जीवन भर अपने भगवान के चरणों में अनुभव करता आया हूँ। सच बताओ, तुम कौन हो?"

यात्री की आँखें प्रेम से भर उठीं। उसने शांत स्वर में कहा, "मैं तुम्हें दान देने नहीं आया हूँ। मैं उस करुणा की आज्ञा का पालन करने आया हूँ जिसने मुझे याद दिलाया कि ईश्वर का सबसे बड़ा धर्म अपने भक्त के आँसू पोंछना है।"

इतना कहते ही चारों ओर दिव्य प्रकाश फैल गया। साधारण यात्री का रूप धीरे-धीरे विलीन होने लगा और उसके स्थान पर स्वयं श्रीहरि नारायण अपने चतुर्भुज दिव्य स्वरूप में प्रकट हो गए। हरिदास यह दृश्य देखकर भावविभोर हो उठा। वह तुरंत उनके चरणों में गिर पड़ा। भगवान ने उसे उठाकर अपने हृदय से लगा लिया।

भगवान ने प्रेमपूर्वक कहा, "वत्स, तुम्हारे कर्मों का फल तुम्हें भोगना आवश्यक था। मैं उस नियम को बदल नहीं सकता था। लेकिन तुम्हारी निष्काम भक्ति ने मुझे तुम्हारे पास आने के लिए विवश कर दिया। कर्म का विधान बना रहा, पर तुम्हारी पीड़ा तुम्हें अकेले नहीं सहनी पड़ी। जहाँ भक्त का विश्वास अडिग होता है, वहाँ मैं स्वयं उसका सहारा बन जाता हूँ।"

उसी क्षण आकाश में घने बादल उमड़ आए। वर्षों से सूखी धरती पर पहली वर्षा की बूँद गिरी। देखते ही देखते मूसलाधार वर्षा होने लगी। खेतों में हरियाली लौट आई। सूखी नदियाँ फिर से बहने लगीं। गाँव के लोगों की आँखों में आशा का प्रकाश लौट आया। ऐसा लगा मानो पूरी प्रकृति भी भगवान की करुणा का उत्सव मना रही हो।

जब भगवान विष्णु पुनः वैकुण्ठ लौटे, तब माता लक्ष्मी स्वयं द्वार पर खड़ी उनका स्वागत कर रही थीं। उनके चेहरे पर संतोष की मुस्कान थी। उन्होंने कहा, "प्रभु, आज आपने सिद्ध कर दिया कि न्याय सृष्टि को चलाता है, लेकिन करुणा उसे सुंदर बनाती है।"

भगवान विष्णु मुस्कुराकर बोले, "देवि, आज तुमने मुझे भी स्मरण कराया कि जहाँ प्रेम, सेवा और दया का निवास होता है, वहीं मेरा सच्चा वैकुण्ठ है। भक्त केवल मेरी पूजा से नहीं, बल्कि मेरे प्रेम से जुड़ता है।"

तभी से यह संदेश तीनों लोकों में फैल गया कि भगवान केवल मंदिरों की मूर्तियों में ही नहीं रहते, बल्कि उस प्रत्येक हृदय में निवास करते हैं जो किसी पीड़ित का दुःख अपना दुःख समझकर उसकी सहायता करता है। किसी भूखे को भोजन देना, किसी निराश व्यक्ति को आशा देना और किसी दुखी के आँसू पोंछना ही ईश्वर की सबसे प्रिय पूजा है। जो मनुष्य दया, सेवा और करुणा के मार्ग पर चलता है, भगवान स्वयं उसके जीवन में किसी न किसी रूप में अवश्य आते हैं।

जय श्री हरि नारायण। जय माँ लक्ष्मी।

13/07/2026

सुदृढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर, समृद्ध उत्तर प्रदेश!

केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी एवं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी जी के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी आज लखनऊ में ₹4,850 करोड़ से अधिक लागत की 03 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लोकार्पण/शिलान्यास कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में ईस्ट-वेस्ट कनेक्टिविटी के साथ अब नॉर्थ-साउथ कनेक्टिविटी को भी नई गति प्रदान की जा रही है। बेहतर सड़क अवसंरचना, विश्वस्तरीय कनेक्टिविटी, सुरक्षित वातावरण और सुशासन के प्रभावी मॉडल के साथ 'नया उत्तर प्रदेश' देश के ग्रोथ इंजन के रूप में निरंतर आगे बढ़ रहा है।

13/07/2026

प्रदेश में East-West Connectivity के लिए पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, गंगा एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे जैसे बेहतरीन नेटवर्क का निर्माण हुआ है।

अब North-South Connectivity को सुदृढ़ करने के लिए नए कॉरिडोर चिह्नित किए गए हैं। साथ ही, 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में बाईपास निर्माण के प्रस्तावों को माननीय केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी जी ने स्वीकृति प्रदान की है। इसके लिए मैं उनका हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।

-मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी

13/07/2026

_मेक्सिको के जालिस्को राज्य में ग्वाडालाजारा-टेपिक हाईवे पर एक भीषण सड़क हादसे में दो बच्चों सहित 9 लोगों की मौत हो गई और 10 घायल हो गए

13/07/2026
12/07/2026

Mumbai News | मुंबईच्या पवईतील NITIE परिसरात मगर आढळून आल्याने परिसरात खळबळ उडाली आहे. स्थानिकांनी मगर दिसताच वनविभागाला तात्काळ माहिती दिली असून पुढील कारवाई सुरू आहे.

12/07/2026

Mumbai News | मुंबईच्या पवईतील NITIE परिसरात मगर आढळून आल्याने परिसरात खळबळ उडाली आहे. स्थानिकांनी मगर दिसताच वनविभागाला तात्काळ माहिती दिली असून पुढील कारवाई सुरू आहे. #ट्रेंडिंग

Want your business to be the top-listed Beauty Salon in Pune?
Click here to claim your Sponsored Listing.

Address


सोपान बाग
Pune
411001